राजस्थान में 6000 फेल्सपार-क्वार्ट्ज उद्योग संकट में:30 दिन में सरकार से नीति लागू करने की मांग, लाखों लोग प्रभावित

राजस्थान के लगभग 6000 फेल्सपार और क्वार्ट्ज आधारित सूक्ष्म एवं लघु उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। ये इकाइयां वर्ष 2016 से अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं और उन्होंने राज्य सरकार से संरक्षण एवं संवर्धन के लिए एक ठोस नीति शीघ्र लागू करने की मांग की है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, फेल्सपार और क्वार्ट्ज खनिजों का उपयोग सिरेमिक, टाइल्स, सेनेटरी वेयर, इंसुलेटर और क्रॉकरी जैसे उद्योगों में प्रमुख कच्चे माल के रूप में होता है। इन उद्योगों में लगभग 50 प्रतिशत तक इन खनिजों की खपत होती है। वर्ष 2016 तक इन दोनों खनिजों की लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति राजस्थान की खानों से होती थी। ये खनिज कच्चे रूप में ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सिलौरा, केकड़ी, बोराडा, नीम का थाना, अजीतगढ़, अजमेर, सीकर, जयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, उदयपुर, डूंगरपुर और पिंडवाड़ा सहित कई क्षेत्रों में स्थापित मिनरल ग्राइंडिंग इकाइयों में संसाधित होकर पाउडर के रूप में देशभर में भेजे जाते थे। 6 लाख लोगों को मिलता है रोजगार
प्रतिनिधियों ने बताया कि यह उद्योग वर्ष 1975 में मात्र 2-4 इकाइयों के साथ शुरू हुआ था और 2024 तक बढ़कर लगभग 6000 इकाइयों तक पहुंच गया है। यह क्षेत्र सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों में राज्य के सबसे तेजी से बढ़ने वाले उद्योगों में से एक रहा है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 6 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है। उद्योगों ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार माइनर और मेजर खनिजों पर मिनरल टैक्स लगाकर प्राप्त राजस्व का उपयोग खनिज प्रोसेसिंग उद्योगों को सब्सिडी देने में कर सकती है। उनका मानना है कि इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा और इन उद्योगों को नया जीवन मिल सकेगा। 30 दिन में नीति लागू करने की मांग
उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 30 दिनों के भीतर इन 6000 उद्योगों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कोई नीति लागू नहीं की गई तो ये इकाइयां स्थायी रूप से बंद हो जाएंगी, जिससे इन पर निर्भर लाखों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
साथ ही, खनिज वैल्यू एडिशन नीति के अभाव में कच्चे खनिजों का राज्य से बाहर निर्गमन हो रहा है, जिससे पड़ोसी राज्यों को औद्योगिक लाभ मिल रहा है। उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि 30 दिनों के भीतर ठोस नीति लागू कर प्रतिनिधि मंडल को विस्तृत चर्चा के लिए आमंत्रित किया जाए, ताकि राज्य के इस महत्वपूर्ण खनिज आधारित उद्योग को बचाया जा सके।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *