राजस्थान यूनिवर्सिटी, मोहनलाल सुखाड़िया विवि उदयपुर और मत्स्य विवि अलवर में ‘विमर्श’ शुल्क के नाम पर 223 करोड़ रुपए वसूलने का मामला विधानसभा में उठने के बाद अब फीस संरचना को लेकर बहस तेज हो गई है। आरयू में नॉन कॉलेजिएट छात्रों से 1000 रुपए विमर्श शुल्क लेने के साथ ही रेगुलर छात्रों से भी 10 मदों में शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे फीस में करीब 2 से 3 हजार रुपए की बढ़ोतरी हो जाती है। आरयू में इस सत्र से 500 रुपए एलुमिनाई एसोसिएशन फीस भी जोड़ी है। छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के बावजूद हर 110 रुपए सदस्यता और 145 रुपए चुनाव शुल्क लिया जा रहा है। इसको लेकर मंगलवार को एनएसयूआई ने यूनिवर्सिटी गेट पर प्रदर्शन कर पुतला फूंका। “विमर्श शुल्क लेकर छात्रों को विमर्श तो दो। सिर्फ डिग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। करियर और जॉब गाइडेंस की सुविधा नहीं है। सरकार विश्वविद्यालयों को पर्याप्त पैसा नहीं दे रही, इसलिए शुल्क बढ़ाकर भार छात्रों पर डाला जा रहा है, जो गलत है।”
-मनीष यादव, विधायक “यूनिवर्सिटी के पास पर्याप्त राजस्व नहीं होता। फीस भी नहीं बढ़ाई गई। ऐसे में फीस के साथ लिए जाने वाले शुल्क छात्रों के कल्याण, परीक्षाओं, कोर्सेज और अन्य कार्यों में खर्च होते हैं।”
-प्रो. अल्पना कटेजा, कुलगुरु, आरयू


