राजस्थान विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान का 12 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम संपन्न हुआ। कोविड-19 के बाद राजस्थान में यह पहला ऑफलाइन पुनश्चर्या पाठ्यक्रम था, जिसमें 12 राज्यों से 46 शिक्षकों और पेशेवरों ने हिस्सा लिया। समापन समारोह में संस्कृति मंत्रालय के महानिदेशक प्रो.अजय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता यूजीसी-एमएमटीटीसी की निदेशक प्रो.रश्मि जैन ने की। प्रो.जैन ने कहा कि पुस्तकालयों में डिजिटल के साथ-साथ पुस्तकों के भौतिक उपयोग को भी प्रोत्साहित करना जरूरी है। 6 जनवरी को शुरू हुए इस कोर्स का उद्घाटन राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.अल्पना कटेजा ने किया था। उद्घाटन सत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा के प्रो. दिनेश कुमार गुप्ता ने डिजिटल तकनीक और सूचना प्रणालियों के भविष्य पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में शिक्षा संकाय के डीन प्रो. यदु शर्मा और पुस्तकालय विभाग के अध्यक्ष प्रो. राम सिंह चौहान भी मौजूद रहे। कोर्स का समन्वयन डॉ. संतोष गुप्ता ने किया। 12-दिवसीय पुस्तकालय और सूचना विज्ञान में पुनश्चर्या पाठ्यक्रम प्रतिष्ठित संसाधन व्यक्तियों द्वारा ज्ञानवर्धक सत्रों के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय था। इन तकनीकी सत्रों में व्याख्यान देने वाले विशेषज्ञों में डॉ. नीरज चौरसिया, प्रो. पूर्णिमा कौशिक, प्रो. दिनेश कुमार गुप्ता, प्रो.शरद कुमार सोनकर, डॉ.परवीन बब्बर, प्रो.एचपीएस कालरा, प्रो.अरविंद कुमार शर्मा, प्रो. एस. पी. सूद, प्रो.मनोज के.वर्मा, डॉ.गोपाकुमार वी., प्रो. एम. पी. सिंह, प्रो. रमेश के. अरोरा, प्रो.जे. के.मिश्रा, डॉ.पी.के.जैन, प्रो.अरुण जुल्का, डॉ. शिवा कनौजिया सुकुला, प्रो. राम सिंह चौहान, प्रो. आर. के. भट्ट, डॉ. संजीव सराफ, प्रो. शिपी वर्मा, प्रो.के.एल. महावर, प्रो. जगतार सिंह, और प्रो. के. पी. सिंह जैसे नाम शामिल थे। विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत सत्रों ने सभी प्रतिभागियों के सीखने के अनुभव को समृद्ध किया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य पुस्तकालय विज्ञान के शिक्षकों की पेशेवर क्षमताओं को उन्नत करना था, जिसमें डिजिटल प्रौद्योगिकियों, एआई उपकरण, डिजिटल युग में कॉपीराइट और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में पुस्तकालयों की भूमिका जैसे उन्नत विषयों पर व्यापक सत्र सम्मिलित थे। समापन समारोह में दीप प्रज्वलन, विश्वविद्यालय द्वारा कुलगीत, और कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विजेंद्र कुमार द्वारा पाठ्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और प्रतिष्ठित अतिथियों के संबोधन ने पाठ्यक्रम की सफलता और प्रभाव को उजागर किया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ.संतोष गुप्ता ने उद्घाटन और समापन दोनों समारोहों का संचालन किया। समापन समारोह के अंत में, सह-समन्वयक डॉ. महेंद्र सिंह राव ने सभी को धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 12 राज्यों के प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेकर इसे सफलतापूर्वक पूर्ण किया, जिससे यह एक यादगार और प्रभावशाली अनुभव बन गया।


