राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति प्रतापगढ़ की बैठक शुक्रवार को बगवास स्थित सभागार में आयोजित हुई। बैठक में विद्युत विभाग के निजीकरण को रोकने और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी 18 दिसंबर को अजमेर डिस्कॉम मुख्यालय पर एक दिवसीय प्रदर्शन की योजना बनाई गई। बैठक में समिति ने बताया कि राज्य सरकार ज्वाइंट वेंचर, क्लस्टर मॉडल और एचएएम मॉडल के तहत बिजली तंत्र का निजीकरण कर रही है। इससे विद्युत उत्पादन, प्रसारण और वितरण तीनों क्षेत्रों में सरकारी भागीदारी को सीमित कर निजी कंपनियों का वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है। समिति ने कहा कि यह कदम राज्य में स्थायी रोजगार के अवसरों को खत्म कर देगा और शिक्षित युवाओं की ऊर्जा क्षेत्र में नौकरी पाने की उम्मीदों पर पानी फेर देगा। बैठक में विभाग के निजीकरण को रोकने के अलावा निम्नलिखित मांगें रखी गईं- बैठक में अजमेर डिस्कॉम मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन के लिए सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया गया। समिति ने इसे सफल बनाने के लिए कार्ययोजना बनाई। निजीकरण के विरोध में एकजुटता इस दौरान समिति ने कहा कि राज्यभर के विद्युत विभाग के तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारी निजीकरण के विरोध में एकजुट हैं और सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। अगर मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। बैठक में समिति के पदाधिकारियों में दुर्लालाल नागर, डूंगर सिंह, सुनील मीणा, राजा राजपूत, मोहन गुर्जर, मुकेश बोराणा, मुकेश कसाना, गोरधन कुमावत, हेमंत कछावा, कृष्णपाल कुमावत और बंशी राठौर सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


