सरकारी स्कूलों में एप के जरिए विद्यार्थियों की उपस्थिति का विरोध शुरू हो गया है। राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने यह कहते हुए इसका विरोध किया है कि स्कूलों में मोबाइल पर पाबंदी है। नेटवर्क की समस्या है। ऐसे में यह आदेश अव्यवहारिक है। इस आदेश को वापस लिया जाए। मंगलवार को संगठन के प्रदेश महामंत्री नवीन कुमार शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। संगठन के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश कुमार मीणा का कहना है कि वर्तमान में शाला दर्पण पोर्टल से दैनिक उपस्थिति का ऑनलाइन दर्ज हो रही है। ऐसे में शिक्षकों से एप्प के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज कराने का कोई औचित्य नहीं है। साथ ही राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों की दृष्टि से भी यह व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि कई दूर-दराज व दुर्गम इलाकों में स्थित कई विद्यालयों में आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या है। इसके अलावा शिक्षकों को स्कूलों में मोबाइल ले जाने पर पाबंदी है। ऐसे में विभाग का यह प्रावधान सही नहीं है। काउंसलिंग में पद छिपाने से दूर दराज इलाकों में मिली पोस्टिंग पिछले दिनों पदोन्नत शिक्षकों के पोस्टिंग आदेश में 500 किमी दूर तक पोस्टिंग दी गई है। इसका बड़ा कारण है कि काउंसलिंग के दौरान विभाग ने सभी खाली पद नहीं दिखाए। पदों को छुपाने के कारण शिक्षक इन पदों पर च्वाइस नहीं भर पाए। ऐसे में उनको कई किमी दूर तक पोस्टिंग मिली है। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता देवकरण गुर्जर का कहना है कि विभाग अगर सभी खाली पदों को काउंसलिंग में दिखाता तो इतनी दूर पोस्टिंग मिलने की नौबत नहीं आती। इससे बड़ी संख्या में पदोन्नत व्याख्याता व प्रिंसिपल को जिले से बाहर जाना पड़ा है।


