– राजमेस सोसायटी संचालित कॉलेज में जोधपुर के वरिष्ठ आचार्य को नियमों की अनदेखी कर किया था पदस्थापन जोधपुर की डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से एक वरिष्ठ आचार्य को नियमों की अनदेखी कर राजमेस सोसायटी संचालित मेडिकल कॉलेज जैसलमेर में डेपुटेशन/स्थानान्तरण के मामले में सुनवाई करते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने रोक लगा दी है। इस मामले में हाइकोर्ट के न्यायाधीश अरुण मोंगा की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 फरवरी तय की है। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रघुवीर चौधरी की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने उच्च न्यायालय में याचिका पेश कर बताया कि वर्तमान में राजस्थान सरकार के अधीन कुल छह मेडिकल कॉलेज है। जो क्रमशः जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा एवं जयपुर में है। इन आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में कार्यरत चिकित्सक शिक्षकों पर राजस्थान सेवा नियम और राजस्थान पेंशन नियम लागू होते हैं। जबकि अन्य जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए राज्य सरकार ने राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसाइटी (राजमेस) बनाकर इनका पंजीयन राजस्थान संस्था रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1958 के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2016 को करवाया गया और इसके अधीन खोले जाने वाले मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए अलग से सेवा नियम 2017, 2022, 2024 बनाए गए थे। तदनुसार राजमेस के अधीन व संचालित मेडिकल कॉलेज में राजस्थान सेवा नियम के प्रावधान लागू नही होते हैं। याचिकाकर्ता डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज जोधपुर में वरिष्ठ आचार्य के पद पर कार्यरत हैं और नियमानुसार उसका पदस्थापन और स्थानान्तरण राजमेस संचालित मेडिकल कॉलेज में याचिकाकर्ता की इच्छा के बिना नहीं किया जा सकता है और न ही राजमेस संचालित मेडिकल कॉलेज में उसकी इच्छा के बगैर डेपुटेशन ही किया जा सकता है। बावजूद इसके, याचिकाकर्ता का 30 दिसंबर 2024 को पदस्थापन/ डेपुटेशन राजमेस संचालित मेडिकल कॉलेज, जैसलमेर में कर दिया गया, जो गैर क़ानूनी है। डॉक्टर टीचर्स का ट्रांसफर – अग्रिम आदेश तक… डॉ. चौधरी के अधिवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार के छह मेडिकल कॉलेजों से चिकित्सक शिक्षकों का स्थानान्तरण अग्रिम आदेशों तक का कहकर किया जाता रहा है, जो नियमानुसार सही नहीं है और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग/ एनएमसी, नई दिल्ली द्वारा किए जाने वाले सामयिक निरीक्षण में निर्धारित चिकित्सक शिक्षकों के आंकड़े पूरे दिखाने और निरीक्षण टीम की आंखों में धूल झोंकने के उद्देश्य से सीमित समय के लिए चिकित्सक शिक्षकों का पदस्थापन/डेपुटेशन/स्थानान्तरण किया जाता रहा है, जो विधि विरुद्ध है। याचिकाकर्ता राजमेस सोसाइटी के सेवा का सदस्य नहीं है, बल्कि वह राजस्थान एजुकेशन मेडिकल सेवा का सदस्य है, जो सेवा नियम 1962 से शासित होता है। ऐसे में उसके मूल कैडर से बाहर स्थानान्तरण किया जाना राजस्थान सेवा नियम के विरुद्ध होकर अवैध और असंवैधानिक है। बिना प्रशासनिक सक्षमता के जारी किए आदेश अधिवक्ता खिलेरी ने कोर्ट को बताया कि राजमेस का अतिरिक्त निदेशक याची का नियुक्ति अधिकारी भी नहीं है। ऐसे में अतिरिक्त निदेशक, राजमेस द्वारा बिना अधिकारिता और बिना प्रशासनिक सक्षमता के आदेश जारी किया गया है, जो पूर्णत अवैध है। रिट याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत होते हुए हाइकोर्ट की एकलपीठ ने 30 दिसंबर 2024 को जारी डेपुटेशन आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को जवाब तलब किया है। मामले में अगली सुनवाई 21 फरवरी होगी।


