राज्य सरकार का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपए का है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब 33 दिन बचे हैं, पर अब तक सिर्फ 92 हजार 467 करोड़ ही खर्च हो पाए हैं। यानी कुल बजट का 63.59% ही व्यय हुआ है। अब सरकार के सामने 52 हजार 933 करोड़ खर्च करने की बड़ी चुनौती है। राज्य का कुल योजना बजट 91,742 करोड़ है। 31 जनवरी 2026 तक इसके मुकाबले 46 हजार 193 करोड़ ही खर्च हुए हैं, जो करीब 50% है। इस योजना बजट में केंद्रीय योजनाओं से जुड़ी राशि 17,074 करोड़ है। इसमें 2,909.98 करोड़ रु. केंद्रीय योजना की राशि है। 14,164.63 करोड़ रु. योजनाओं के लिए केंद्रांश है। राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा मुश्किल
सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 1,25,153 करोड़ रुपए राजस्व आय का लक्ष्य रखा है। 11 माह 26 दिन में 89,449 करोड़ रुपए ही जुट पाए हैं, जो लक्ष्य का 71.50% है। अब 31 मार्च तक 35 हजार 659 करोड़ रुपए और जुटाने होंगे। यानी 33 दिन में 28.50% राजस्व संग्रह करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य कर विभाग समेत कई विभागों की वसूली बेहतर नहीं है। माहवार आय-खर्च की स्थिति (राशि करोड रूपए में) जानिए…किन विभागों ने कितना खर्च किया
विभाग बजट खर्च, 31 जनवरी 2026 तक प्रो. धीरज मणि पाठक, अर्थशास्त्री 1. बड़ा बजट, जमीन पर तैयारी नहीं: परंपरा और प्रतिस्पर्धा के कारण बड़ा बजट बना दिया जाता है। कई योजनाएं जमीन अधिग्रहण या तैयारी के बिना ही शामिल कर ली जाती हैं। बाद में काम शुरू ही नहीं हो पाता।2. मैनपावर की भारी कमी: राज्य में 3,51,968 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 1,64,358 पद खाली हैं। सिर्फ 1,87,610 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। स्टाफ की कमी से काम धीमा पड़ता है और खर्च भी नहीं हो पाता।3. बजट आवंटन में संतुलन की कमी:कई बार जिस विभाग की क्षमता कम होती है, उसे ज्यादा राशि मिल जाती है। और जो विभाग ज्यादा काम कर सकता है, उसे कम आवंटन मिलता है।4. अनुपूरक बजट में देरी: तीसरे अनुपूरक बजट में राशि का पुनर्वितरण होता है। कम समय मिलने से विभाग न तो काम पूरा कर पाते हैं और न भुगतान। कई बार राजकोष में पर्याप्त राशि नहीं होने से भी भुगतान अटकता है।


