महाशिवरात्रि के अवसर पर धार के प्राचीन धारेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। मान्यता के अनुसार, धारेश्वर मंदिर का निर्माण राजा भोज के पिता द्वारा कराया गया था। स्वयं राजा भोज भी प्रतिदिन इस मंदिर में दर्शन के लिए आते थे। यही कारण है कि यह मंदिर सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर यहां भी बाबा धारनाथ की शाही सवारी निकाली जाती है। यह सवारी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है। भक्तजन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए फल, फूल, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, जल और दूध अर्पित कर रहे हैं। महादेव की एक झलक पाने की उम्मीद में श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया गया है। इससे यहां का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं का मानना है कि धारेश्वर मंदिर में दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के कारण वे प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां दर्शन के लिए आते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो और दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।


