राजिम कुंभ 2026…इजराइली महिला बोलीं- राम-राम:अमेरिका-यूरोप के टूरिस्ट बोले- यहां के लोग दयालु और रिस्पेक्ट देते हैं, महानदी में महिलाओं ने की जल साधना

राजिम कल्प कुंभ का समापन महाशिवरात्रि पर्व के साथ हो गया है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु राजिम पहुंचे। कुंभ मेले में साधु-संतों की भी बड़ी मौजूदगी रही, जहां कई तरह की साधनाएं और तप करते संत देखने को मिले। राजिम कुंभ में एक साध्वी के साथ दर्जनों भक्त महानदी में जल साधना करते नजर आए। इस दौरान श्रद्धालु नदी में उतरकर अलग-अलग आवाज निकालते हुए चीखते दिखाई दिए। यह दृश्य मेले में श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा। राजिम कुंभ में इस बार कई विदेशी पर्यटक भी पहुंचे, जो भारतीय संस्कृति और आस्था में रंगे नजर आए। इजरायल की महिला पर्यटक वैयरा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए। वैयरा ने कहा, राजिम कुंभ में उनका अनुभव शानदार था। वह भारत से बहुत प्यार करती है, हम लोग उत्तर प्रदेश के कुंभ मेला में भी गए थे। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मेले में भी हमें वैसा ही अनुभव मिला। इस तरह का त्यौहार हमें बहुत पसंद आता है और हमने इसे खूब इंजॉय किया। इस तरह का फेस्टिवल इजराइल में होता है, इस सवाल के जवाब में वैयरा ने कहा ऐसा फेस्टिवल नहीं वहां दूसरे तरह का त्यौहार होता है। लेकिन भारत में कुंभ मेला, होली और राजस्थान के कई त्यौहार बहुत ही अलग होते हैं। जो हमारे देश में देखने को नहीं मिलते इसलिए इजरायल के लोग इन त्योहारों को देखने के लिए इंडिया आते हैं। वैयरा ने बताया यहां के लोग दयालु और रिस्पेक्ट देते हैं। उन्हें फोटोग्राफी में भी दिक्कत नहीं है। मैं यहां के फेस्टिवल की खूब सारी फोटो लेकर अपने देश वापस जाऊंगी। इन फोटोस को दिखाकर मैं उन्हें भी इंडिया घूमने के लिए प्रेरित करूंगी। पहले ये तस्वीर देखिए… अमेरिका और यूरोप के पर्यटन भी पहुंचे राजिम कुंभ में अमेरिका से आए पर्यटक जॉनसन और मीरा ने बताया कि भारत भ्रमण के दौरान वे पहली बार छत्तीसगढ़ आए हैं और राजिम कुंभ ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने इसे छोटा लेकिन बेहद सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मेला बताया। वहीं इटली, नाइजीरिया सहित अन्य देशों के पर्यटक भी कई दिनों से मेले की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आभा में डूबे नजर आए। 40,000 KM साइकिल चलाने वाले बाबा राजिम कुंभ के संत समागम में पहुंचे श्याम गिरी बाबा की खास पहचान है कि वे अब तक करीब 40 हजार किलोमीटर साइकिल यात्रा कर चुके हैं। वे देशभर में साइकिल से एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करते हैं। वर्तमान में वे दक्षिण भारत यात्रा पर निकले थे, लेकिन राजिम कुंभ के कारण उन्हें आधे रास्ते से वापस लौटना पड़ा। श्याम गिरी बाबा ने बताया कि वे अपने गुरु की आज्ञा का पालन कर रहे हैं। वे सनातन धर्म का प्रचार करते हुए साइकिल से यात्रा कर लोगों को स्वास्थ्य का संदेश दे रहे हैं। यात्रा में चीता और सांपों से भी हुआ सामना श्याम गिरी बाबा ने बताया कि यात्रा के दौरान कई बार उनका सामना खतरनाक जंगली जानवरों से हुआ। उन्होंने कहा कि एक बार चीता पेड़ पर बैठा हुआ था, लेकिन वे डरे नहीं और आगे बढ़ते गए। वहीं कई बार साइकिल चलाते समय जहरीले सांप भी उनके पैरों के पास आ चुके हैं। नागा साधु बोले- पहले जैसा सेवा भाव अब नहीं रहा उत्तराखंड से आए नागा साधु दिगंबर आनंद गिरि ने कहा कि कुछ साल पहले तक राजिम कुंभ में व्यवस्थाएं बेहतर होती थीं, लेकिन इस बार व्यवस्था उतनी अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बार हर चीज के लिए दबाव डालकर काम करवाना पड़ रहा है। दिगंबर आनंद गिरि ने बताया कि वे पिछले 45 सालों से नागा साधु हैं। उन्होंने 10 साल की उम्र से ही देश के अलग-अलग राज्यों और धार्मिक स्थलों की यात्रा शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि वे राजिम कुंभ की पवित्र भूमि पर भगवान शिव की आराधना के लिए पहुंचे हैं। उनका कहना है कि सनातन धर्म को मजबूत करने और विश्व कल्याण के लिए वह लगातार तप कर रहे हैं। महानदी में महिलाओं ने जलमग्न होकर की जल साधना राजिम कुंभ में महानदी के बीच दर्जनों महिलाएं जलमग्न होकर जल साधना करती नजर आईं। भक्तों के अनुसार, यह साधना तंत्र क्रिया के अंतर्गत की जाती है, जिसे गुरु के मार्गदर्शन में किया जाता है। इस दौरान महिलाएं अलग-अलग मुद्राओं में तेज आवाज में चीखते हुए दिखाई दीं। मान्यता है कि इस साधना में इस प्रकार आवाज निकालना महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रुद्राक्ष मुकुट वाले बाबा बोले- खुद का पिंडदान किया बागबाहरा के भीम गिरी नागा बाबा भी राजिम कुंभ पहुंचे। उन्होंने सिर पर 1100 रुद्राक्ष का मुकुट धारण किया था। भीम गिरी नागा ने बताया कि नागा साधु बनने के लिए पहले गुरु की शरण में जाना होता है। इसके बाद 16 प्रकार का पिंडदान होता है और 17वां पिंडदान व्यक्ति खुद का करता है। उन्होंने बताया कि वे हर महाशिवरात्रि पर मुकुट में रुद्राक्ष की संख्या बढ़ाते हैं। उनके अनुसार यह मुकुट उनके तप और साधना का प्रतीक है और अब तक इसमें 1100 रुद्राक्ष हो चुके हैं। समापन पर CM विष्णुदेव साय पहुंचे राजिम कुंभ महाशिवरात्रि पर कुंभ समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजिम पहुंचे। उन्होंने महानदी संगम की विशेषता पर चर्चा करते हुए कहा कि यह तप और त्याग की भूमि है, इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में राजिम कुंभ को और अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री की पत्नी ने की महानदी की आरती राजिम कुंभ में मुख्यमंत्री की पत्नी कौशल्या साय ने भी महानदी मैया की आरती की। इस दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही और माहौल भक्तिमय बना रहा। ये तस्वीरें भी देखिए… …………………….. राजिम कुंभ से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… विधायक ने CEO को बोला-सरकार की धनिया बो रहे हो:राजिम कुंभ में बदइंतजामी पर भड़के, बोले- कलाकारों को भूखा रखा, इमेज खराब कर रहे
राजिम कुंभ में अव्यवस्थाओं को देख राजिम से भाजपा विधायक रोहित साहू अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए जिला पंचायत CEO प्रखर चंद्राकर को फटकार लगाई। कहा कि, सरकार की इमेज की धनिया बो रहे हैं। बेइज्जती हो रही है। बता दें प्रखर चंद्राकर को मेले का नोडल अधिकारी बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर

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