राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के आगामी चुनावों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि सरकार में मंत्री अपने परिवार के सदस्यों को क्रिकेट संघ में सेट करने की खींचतान में उलझे हैं, जिससे चुनाव में देरी हो रही है। हाल ही में सोशल मीडिया ‘X’ पर खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और संयम लोढ़ा के बीच भी खूब बयानबाजी हुई। भास्कर से बातचीत के दौरान भी संयम लोढ़ा ने पूर्व मंत्री, चिकित्सा मंत्री, शिक्षा मंत्री और पंचायती राज मंत्री पर अपने बेटों और परिचितों को खेल की सियासत में सेट करने का आरोप लगाया। उनके इन आरोपों का जवाब हमने राजेंद्र राठौड़ से लिया। पढ़िए ये रिपोर्ट…. RCA चुनाव में देरी पर शुरू हुआ विवाद राजस्थान सरकार के गठन के बाद राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में उठा पटक शुरू हो गई थी। जिसके बाद वैभव गहलोत ने इस्तीफा दिया था। 29 मार्च, 2024 में राजस्थान क्रिकेट संघ को भंग करके एडहॉक कमेटी बनाई गई और तब से एडहॉक कमेटी ही राजस्थान की क्रिकेट को चला रही है। जिसका संयोजक श्रीगंगानगर विधायक जयदीप बिहानी को बनाया गया। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के इतिहास में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है जब 11 महीने बीत जाने के बाद भी कार्यकारिणी नहीं बन पाई है। एडहॉक कमेटी ही राजस्थान की क्रिकेट को संचालित कर रही है। तीसरी बार इसका कार्यकाल बढ़ाया गया है। एडहॉक कमेटी मार्च के अंतिम सप्ताह तक राजस्थान की क्रिकेट को चलाएगी। इधर, कई प्रभावशाली नेताओं के बेटे और करीबी जिला क्रिकेट संघों के जरिए एंट्री मार रहे हैं… इस पूरे मामले पर भास्कर ने लंबे समय से क्रिकेट संघ से जुड़े रहे पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र राठौड़ से सवाल जवाब किए…. संयम लोढ़ा से सवाल-जवाब सवाल : आप खुद भी राजस्थान क्रिकेट संघ (RCA) में थे, तब भी विवाद होते थे, अब फिर सवाल क्यों? संयम लोढ़ा : सरकार को खुद आगे आकर स्थिति साफ करनी चाहिए। पिछला जो निर्वाचित संघ था उसके सामने ज्यादा चुनौतियां थी। बीसीसीआई से संबद्धता का भी मामला था। लेकिन पिछले संघ ने बिना विवादों में पड़े काम को प्राथमिकता दी। जयपुर में स्टेडियम के काम की शुरुआत हो पाई। जमीन का आवंटन हो या उसका निर्माण हो। क्रिकेट का आधारभूत ढांचा मजबूत करने में लगे रहे। अलग-अलग तरह के कई नए टूर्नामेंट शुरू हुए। राजस्थान के खिलाड़ियों को अवसर भी मिले। क्रिकेट का हित ही सब कुछ है। सवाल : आपने कई मंत्रियों पर परिवार के लोगों को आरसीए में सेट करने के आरोप लगाए, लेकिन कांग्रेस राज में वैभव गहलोत खुद RCA अध्यक्ष थे? संयम लोढ़ा : वैभव गहलोत कई सालों से जिला क्रिकेट संघ से जुड़े थे, अध्यक्ष तो बहुत बाद में बने। सरकार बदलते ही सबसे पहले गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जाकर क्रिकेट के संघ को भंग करने के लिए कार्य योजना बनाई। राजस्थान क्रिकेट संघ को भंग किया गया। तब भी सभी जिला संघों ने धनंजय खींवसर को स्वीकार किया जिससे कि क्रिकेट का हित हो। लेकिन सरकार के अंदरूनी झगड़ों के कारण चुनाव नहीं कराए जा रहे। एडहॉक कमेटी बैठाई गई, जिसकी अवधि बार-बार बढ़ाई जा रही है। मुख्यमंत्री के कार्यालय से कई जिला संघों को भंग किया गया। सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं के बेटों को पिछले दरवाजे से जो क्लबों के भी मेंबर नहीं है, जिलों के भी सदस्य नहीं है, उन्हें प्रवेश कराया गया। इन सबके बाद भी आप कम से कम चुनाव तो कराइए। जो दो-दो रन भी नहीं बनाते हैं वो राजस्थान टीम से खेल रहे हैं। सवाल : आपने आरोप लगाया कि कई लोग क्रिकेट से नहीं जुड़े रहे हैं, कौन हैं ये लोग? संयम लोढ़ा : हर जिले में मंत्री और विधायकों के बेटे शामिल किए गए हैं, जो क्लबों के सदस्य भी नहीं हैं। सवाल : क्या आप कुछ नाम बता सकते हैं? संयम लोढ़ा : जिलों की सूची देखने से स्पष्ट हो जाएगा। मैं नाम लेकर उन्हें अतिरिक्त महत्व नहीं देना चाहता। सवाल : राज्यवर्धन राठौड़ का कहना है कि क्रिकेट का निर्णय क्रिकेट पिच पर होना चाहिए, न कि राजनीति के आधार पर? संयम लोढ़ा : उनकी प्रतिक्रिया स्वागत योग्य है, लेकिन अफसोस कि वे खुद पिच पर फैसला नहीं कर रहे, बल्कि नेट प्रैक्टिस में व्यस्त हैं। राज्यवर्धन राठौड़ स्पोर्ट्स से जुड़े रहे हैं इसलिए उनसे उम्मीद थी कि वे क्रिकेट को बढ़ावा देंगे, लेकिन पिछले वर्षों में क्रिकेट को नष्ट करने का काम हुआ है। स्पोर्ट्स काउंसिल की हालत देख लीजिए। सत्ता के दुरुपयोग से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। देखिए क्या हुआ, अजमेर में कितने टाइम से अपील पड़ी थी और कितने साल बाद उसे निरस्त कर दिया। भीलवाड़ा में फॉर्म भर दिए लेकिन किसी सांसद के परिचित को अंदर लाने के चक्कर में फॉर्म भरने के बाद भी चुनाव नहीं कराए गए। ये सब आपस में लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री इसलिए नहीं बोल रहे कि मैं क्यों बुरा बनूं। संयम लोढ़ा : आपने चिकित्सा मंत्री, शिक्षा मंत्री और पंचायती राज मंत्री के परिजनों पर भी आरोप लगाए? जवाब: मुख्यमंत्री खुद निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं। वे खुले तौर पर मान चुके हैं कि वे किसी भी पक्ष में नहीं खड़े हो सकते। कई मंत्रियों और विधायकों के परिजन एसोसिएशन में शामिल कराए गए हैं, जिनका क्रिकेट से कोई संबंध नहीं है। जिलों में देखिए चिकित्सा मंत्री के पुत्र आ चुके हैं। पूर्व प्रतिपक्ष नेता के पुत्र आ चुके हैं। शिक्षा मंत्री के परिवार के सदस्य आ चुके हैं। पंचायती राज मंत्री के बेटे आ चुके हैं। इस तरीके से ऐसे लोगों की एंट्री हो रही है जो किसी क्लब के मेंबर तक नहीं। क्लबों की लिस्ट में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करके नाम जोड़े गए हैं, और मामला कभी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जाएगा तो सच्चाई सामने आ जाएगी। राजेन्द्र राठौड़ से सवाल- जवाब सवाल: संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि क्रिकेट का राजनीतिकरण किया जा रहा है, पहले बीजेपी ऐसे आरोप कांग्रेस पर लगाती थी, अब उल्टा हो रहा है? राजेन्द्र राठौड़ : संयम लोढ़ा जी आजकल मेरी तरह बेरोजगार हैं। वे बहुत अच्छे पार्लियामेंटेरियन रहे हैं, लेकिन कभी-कभी बेरोजगारी के कारण ऐसे विषयों पर बोलने की आदत पड़ जाती है, जिनका कोई ठोस आधार नहीं होता। RCA को लेकर उन्हीं संयम लोढ़ा जी की अगुवाई में मुख्यमंत्री के पुत्र की ताजपोशी हुई थी। उस समय RCA में क्या-क्या हुआ, यह किसी से छुपा नहीं है। कांग्रेस के पूर्व चीफ रामेश्वर डूडी को नामांकन पत्र तक दाखिल नहीं करने दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति स्पष्ट है- अगर किसी नेता या मंत्री का परिवार जन खेल संगठन से जुड़ना चाहता है, तो उसे योग्यता के आधार पर आना होगा। मैंने स्पोर्ट्स एक्ट पढ़ा है, उसमें यह नहीं लिखा कि किसी पूर्व या वर्तमान मंत्री का बेटा इसमें नहीं आ सकता। यदि योग्यता होगी, तो आगे बढ़ेंगे, नहीं होगी तो नहीं बढ़ेंगे। संयम को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए। वे मेरे अच्छे मित्र हैं, मुझे सलाह देते हैं कि मैं लिखने-पढ़ने में व्यस्त रहूं, लेकिन अब मैं उन्हें सलाह दूंगा कि संयम जी अब अपना जमाना इस तरह की टिप्पणियां करने का नहीं है। अगर कोई समसामयिक मुद्दा है, तो आइए, बैठकर चर्चा करेंगें। सवाल: आपका बेटा पराक्रम सिंह राठौड़ चूरू जिला क्रिकेट संघ का अध्यक्ष है। संयम लोढ़ा का कहना है कि कई लोग, जिन्होंने ब्लॉक स्तर पर भी क्रिकेट नहीं खेला, उन्हें जिला स्तर पर अध्यक्ष बना दिया गया? राजेन्द्र राठौड़ : अगर इसी तर्क पर चलें, तो वैभव गहलोत बहुत बड़े रणजी प्लेयर रहे होंगे या उन्होंने क्रिकेट में देश का नाम रोशन किया होगा। अगर उन्होंने बल्ला भी सही से पकड़ा होता, तो बात समझ में आती। कांग्रेस ने खेलों में राजनीति को जिस तरह घुसाया, उसी का नतीजा है कि आज हमें इस पर चर्चा करनी पड़ रही है। ये स्पोर्ट्स एक्ट क्यों आया, इसलिए तो आया। ये सुरेश कलमाड़ी कौन थे? एशियाड़ के खेलों में किसने चांदी कूटी? इसलिए इसमें लंबी बहस हो सकती है। सवाल- ….तो फिर चुनाव कराने में देरी क्यों हो रही है? क्या भाजपा RCA को पूरी तरह नियंत्रित करना चाहती है? राजेन्द्र राठौड़ : इसमें कौन सा इलेक्ट्रॉल है। इसमें जिलों का एक-एक प्रतिनिधि है। ऐसे संगठन जिस तरीके से चले हैं वैसे ही चलेंगे। इसमें कहने में क्या संकोच है। जब तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के साथ बैठकर संयम ऐसी बात करे थे। सीपी जोशी कौन से खिलाड़ी थे। हां, राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। लेकिन ऐसे मुद्दों पर चर्चा न की जाए तो ज्यादा ठीक रहेगी। सवाल: खेल मंत्री भी अपनी पत्नी को इसमें आगे लाना चाहते हैं? राजेन्द्र राठौड़ : यह अंदरूनी बातें उनके पास कहां से आईं? पति-पत्नी के बीच में बहुत सूक्ष्मता की राजनीति करने लग गए। कुछ भी बात को कैसे भी बिना ओरछोर के नहीं चलानी चाहिए। अगर उनकी पत्नी रुचि रखती हैं योग्यता रखती हैं तो अयोग्यता कहां है। सवाल : क्या आप मानते हैं कि RCA को राजनीति से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए? राजेन्द्र राठौड़ : हां, खेल की राजनीति को सक्रिय राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। लंबे समय से ऐसा चलता आ रहा है इसका पटाक्षेप होना चाहिए।


