राज्यसभा में मध्य प्रदेश में मूंग की खरीदी और उसे क्लस्टर में शामिल न किए जाने के मुद्दे पर जमकर बहस हुई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र होशंगाबाद (नर्मदापुरम), सीहोर और हरदा का हवाला देते हुए पूछा कि यहां थर्ड क्रॉप के रूप में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन हो रहा है, फिर भी इसे किसी श्रेणी/क्लस्टर में क्यों नहीं रखा गया और इस सीजन में कितनी खरीदी हुई। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारियों ने अधिक केमिकल पेस्टिसाइड उपयोग को वजह बताते हुए मूंग को “अनहेल्दी” बताया, जिसके कारण खरीदी देर से शुरू हुई। तब तक किसान फसल बेच चुके थे और इसका फायदा व्यापारियों ने उठा लिया। उन्होंने पूछा कि सरकार ने मूंग उत्पादक जिलों को क्लस्टर में क्यों नहीं जोड़ा। शिवराज बोले- मेरे क्षेत्र की बड़ी चिंता हो रही इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि पूर्व मुख्यमंत्री को उनके संसदीय क्षेत्र की चिंता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय दलहन उत्पादन कम था और एक ही फसल होती थी, जबकि वर्तमान सरकार की सिंचाई व्यवस्थाओं के कारण तीन-तीन फसलें संभव हुईं, जिनमें मूंग भी शामिल है। उन्होंने दावा किया कि मूंग की खेती बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। शिवराज बोले- गर्मी के मौसम में 20 लाख टन दलहन पैदा कर रहे किसान
शिवराज ने कहा कि मध्य प्रदेश के किसान गर्मी के मौसम में करीब 20 लाख मीट्रिक टन दलहन उत्पादन कर रहे हैं और मूंग की पारदर्शी खरीदी व्यवस्था वर्तमान सरकार ने बनाई। पिछले साल भी रिकॉर्ड खरीदी एनडीए सरकार के नेतृत्व में हुई। उन्होंने कहा कि भावांतर भुगतान योजना और भौतिक खरीदी, दोनों में से एक व्यवस्था लागू होती है, दोनों साथ नहीं चलतीं। उन्होंने यह भी कहा कि सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम और हरदा में मूंग का भरपूर उत्पादन हो रहा है, इसलिए अलग से क्लस्टर की जरूरत नहीं है। सरकार मूंग उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है और आगे भी किसानों से खरीदी सुनिश्चित की जाएगी।


