राज्य के 500 से अधिक हेल्थ सेंटरों में खून की जांच बंद, कहीं रीएजेंट नहीं तो कहीं मशीन बंद

राज्य के 800 से अधिक प्रायमरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में खून की जरूरी जांच करीब दो साल से बंद है। कहीं मोक्षित कंपनी की मशीनें लॉक होने के कारण जांच नहीं की जा रही है, कहीं रीएजेंट न होने के कारण मरीजों को लौटाया जा रहा है। केवल विकासखंडों में खोली गई हमर लैब में ही खून से संबंधित सभी तरह की जांच हो रही है। सभी मरीजों को वहीं रिफर किया जा रहा है लेकिन दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के सभी मरीजों के लिए हमर लैब पहुंचना संभव नहीं है। इसलिए मरीज मजबूरी में पैसे खर्च कर जांच करवा रहे हैं। राज्य शासन ने प्रायमरी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ जिला और मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी लैब निजी संस्था के माध्यम से करवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए अनुबंध कर लिया गया है। संस्था के तकनीशियन अभी ये पता लगा रहे हैं कि किन सेंटरों में जांच हो रही और कहां बंद है। इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। इसी बीच भास्कर ने पड़ताल की और ये पता लगाया कि अभी राज्य के सरकारी हेल्थ सेंटरों में जांच की क्या स्थिति है। इस दौरान पता चला कि हमर लैब को छोड़कर कहीं भी सभी जांच नहीं हो रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लैब तो लगभग बंद जैसी स्थिति में है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इक्का-दुक्का जांच हो रही है। उसमें में हार्ट, लीवर, किडनी फंक्शन और थायराइड जैसी जरूरी जांच बंद है। तुरंत रिपोर्ट देने वाली एक्स-रे मशीन एक-दो माह चलकर हो गई बंद
खून की जांच के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक एक्स-रे मशीन तक अर्से से बंद पड़ी है। इलेक्ट्रानिक एक्स-रे मशीन जांच के तुरंत बाद रिपोर्ट उपलब्ध कराती है। इस कंपनी की सप्लाई करीब तीन साल पहले कांग्रेस शासन काल में की गई थी। खून जांच वाली मशीन की तरह ही एक्स-रे की इलेक्ट्रानिक मशीन भी दो-तीन माह चलने के बाद बंद हो गई। पुरानी एक्स-रे मशीन जिन हेल्थ सेंटरों में चल रही है वहां किसी तरह काम चलाया जा रहा है। जांच का नाम: सीरम इलेक्ट्रोलाइट सोडियम पोटेशियम कैल्शियम
उपयोग: ये खून में खनिज लवणों का संतुलन (डिहाइड्रेशन, किडनी, हृदय स्वास्थ्य) जांचते हैं, जबकि HbA1c पिछले 2-3 महीनों के औसत ब्लड शुगर (मधुमेह) की जांच है। यह दोनों ही टेस्ट शरीर के मेटाबॉलिज्म, अंगों के काम करने की क्षमता और डायबिटीज प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण रक्त जांच हैं। जांच का नाम : सीरम एचबीए 1सी
उपयोग : खून की इस जांच से पिछले 2-3 महीनों के औसत ब्लड शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को मापता है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर मरीजों के इलाज की दिशा तय होती है। जांच का नाम : सीबीसी
उपयोग: खून की इस जांच के माध्यम से 22 तरह के पैरामीटर का पता चलता है। ये शरीर में लाल रक्त कोशिका, श्वेत रक्त कोशिका, हीमोग्लोबिन, हेमेटोक्रिट और प्लेटलेट्स की मात्रा की जांच करता है। इससे एनीमिया, इन्फेक्शन, सूजन, ब्लीडिंग विकार और कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने में मदद मिलती है। सीजीएमएससी के अफसर रीएजेंट केमिकल की खरीदी नहीं कर पा रहे
पड़ताल के दौरान पता चला है कि धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार और बेमेतरा सहित राजधानी से लगे ज्यादातर जिलों में केवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही एक्स-रे और खून की सभी जांच की जा रही है। बाकी सरकारी हेल्थ सेंटरों में खून और एक्स-रे जांच करने वाली मशीनें धूल खा रही है। सरकारी अस्पतालों व हेल्थ सेंटरों में रीएजेंट और मशीनों की खरीदी का जिम्मा सीजीएमएससी को दिया गया है।

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