राजस्थान की अर्थव्यवस्था में निर्यात एक मजबूत इंजन बन सकता है। इसके लिए बजट में सामान्य घोषणाओं से आगे बढ़कर सेक्टर-वाइज घोषणाओं का लक्ष्य तय करना होगा। नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक यानी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) 2024 के अनुसार संसाधन, उत्पादन क्षमता और भौगोलिक स्थिति के बावजूद राजस्थान निर्यात प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह उच्च लॉजिस्टिक लागत, कमजोर मूल्य संवर्धन, एमएसएमई की सीमित भागीदारी और नीतिगत समर्थन की कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्थान सरकार बजट में कृषि, खनिज, हस्तशिल्प, विनिर्माण, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स के लिए अलग-अलग रणनीति अपनाती है, तो राज्य की निर्यात हिस्सेदारी में ठोस बढ़ोतरी संभव है। भास्कर एक्सप्लेनर – कृषि और एग्री-प्रोसेसिंग नीति आयोग के अनुसार राजस्थान खाद्य तेल, तिलहन और कृषि उत्पादों का बड़ा उत्पादक है, लेकिन निर्यात अब भी कच्चे माल तक सीमित है। बजट में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग और एग्री-प्रोसेसिंग क्लस्टर पर निवेश से मूल्य संवर्धन होगा। जीआई टैग उत्पादों और ऑर्गेनिक फार्मिंग को जोड़ने पर वैश्विक बाजार का लाभ मिलेगा। खनिज और धातु- जिंक और सीसा जैसे खनिजों में अग्रणी होने के बावजूद राजस्थान का निर्यात लाभ सीमित है। बजट में मिनरल वैल्यू-एडिशन पार्क, ऊर्जा-कुशल प्रसंस्करण और हरित तकनीक को प्रोत्साहन देकर राज्य वैश्विक मेटल वैल्यू चेन में ऊंची जगह बना सकता है। हस्तशिल्प, वस्त्र और GI उत्पाद- प्रदेश का हस्तशिल्प और वस्त्र वैश्विक पहचान रखते हैं, लेकिन कारीगरों को सीधा बाजार नहीं मिल पाता। बजट में डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट सपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग फंड की घोषणा से छोटे उत्पादक सीधे निर्यातक बन सकते हैं। इंजीनियरिंग और उभरता विनिर्माण- फर्नीचर, ऑटो कंपोनेंट और रबर टायर जैसे उत्पाद राजस्थान के औद्योगिक विस्तार का संकेत हैं। बजट में इंडस्ट्रियल क्लस्टर अपग्रेडेशन, टेस्टिंग लैब्स और गुणवत्ता प्रमाणन को प्राथमिकता देने से उच्च मूल्य वाले निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। एमएसएमई – ईपीआई 2024 के अनुसार एमएसएमई का निर्यात योगदान कमजोर है। बजट में सस्ता क्रेडिट, निर्यात बीमा, डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म और जिला निर्यात कार्ययोजनाओं के लिए विशेष प्रावधान जरूरी हैं, ताकि छोटे उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ सकें। लॉजिस्टिक्स – राजस्थान के लिए उच्च लॉजिस्टिक लागत सबसे बड़ी चुनौती है। बजट में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, ड्राई पोर्ट, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से अंतिम-मील कनेक्टिविटी पर निवेश से निर्यात लागत घटेगी और समयबद्ध आपूर्ति संभव होगी। रोड मैप तैयार करना होगा
“जैसा नीति आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है निर्यात को बढ़ाने के लिए राज्य को समग्र रूप से रोड मैप तैयार करना होगा, जिससे राजस्थान में निर्यात के लिए एक अनुकूल वातावरण बन सके।”
-डॉ. मनीष तिवारी, निदेशक एससीएम सोशल रिसर्च इंस्टीट्यूट


