भास्कर संवाददाता | चूरू राजस्थान कला एवं साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने राज्य बजट में साहित्य के लिए एक भी शब्द नहीं होने पर हैरानी जताई है। सहारण ने कहा कि इस बजट में कहीं भी “साहित्य’, “साहित्य अकादमी’, “साहित्य उत्सव” जैसा शब्द नहीं है। वह भी जब, तब उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी खुद का यह विभाग (कला, साहित्य, संस्कृति) है। इस बजट में साहित्य के नाम पर है तो सिर्फ गोपालदास नीरज की कुछ पंक्तियां हैं। मौजूदा सरकार को पूर्ववर्ती सरकार से प्रेरणा लेनी चाहिए थी। इस बजट की राजस्थान के साहित्यकार निंदा करते हैं, भर्त्सना करते हैं तथा पुरजोर तरीके से मांग करते हैं कि संशोधित बजट में साहित्य क्षेत्र व अकादमियों को सभी बकाया बजट देते हुए नए सत्र के लिए दस गुने बजट का प्रावधान जोड़ा जाए। साहित्य उत्सव के लिए बजट प्रावधान किया जाए। सहारण ने कहा कि किसी भी जवाबदेह सरकार का यह नैतिक दायित्व होता है कि निरंतर संचालित संस्थाओं, योजनाओं को जिंदा रखे, तथा साथ ही अपनी दृष्टि से उसमें और भी कुछ जोड़ती चले।


