राज्य सरकार 16 वें वित्त आयोग से मांगेगी एसआरई व विशेष केंद्रीय सहायता राशि, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में करेगी खर्च

16 वें वित्त आयोग की टीम 28 मई को चार दिवसीय दौरे पर रांची आएगी। आयोग झारखंड की स्थिति को लेकर राज्य सरकार व राजनीतिक दलों के साथ बैठक करेगी। राज्य सरकार मांग पत्र को फाइनल करने में जुट गई है। 29 व 30 मई को आयोग की टीम और राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक होगी। आयोग की टीएम फील्ड विजिट भी करेगी। राज्य सरकार आयोग के सामने राज्य की जरूरत के मुताबिक आर्थिक सहायता की तस्वीर पेश करेगी। इसमें विभागों की आवश्यकता बताई जाएगी। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि 16 में वित्त आयोग से झारखंड सरकार बंद हो चुकी एसआरई (सिक्योरिटी रीजन एक्सपेंडीचर) और विशेष केंद्रीय सहायता की राशि मांग करेगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने मान लिया है, राज्य में उग्रवाद नियंत्रित हो गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि पुलिसिया कार्रवाई के बाद उग्रवाद हमेशा के लिए खत्म रहेगा। उग्रवाद परिवेश में रहने वाले लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की योजना चलानी होगी। रोजगार के अवसर बनाने होंगे। आवागमन की व्यवस्था पर काम करना होगा। प्राथमिक विद्यालय से लेकर स्वास्थ्य केंद्रो को मजबूत बनाना होगा। ऐसा आधारभूत संरचना तैयार करना होगा कि लोगों को प्रशासनिक न्याय भी मिले। यदि ऐसी स्थिति नहीं बनेगी तो कभी भी फिर से उग्रवाद पनप सकता है। उन्होंने कहा कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के लिए एसआरई और विशेष केंद्रीय सहायता से योजनाएं चलाई जाती थी। वे बंद हो गई है। उन्हें चालू करने की जरूरत है। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए भी राशि की जरूरत होगी। नदियों में बरसात का पानी रोकने की योजना पर जोर वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड सूखा प्रभावित राज्य है। राज्य में पीने का पानी से लेकर सिंचाई के लिए भी जल संकट है। शहरी क्षेत्र में भी पानी आपूर्ति एक समस्या है। प्रत्येक वर्ष भू-जलस्तर नीचे जा रहा है। 11 नदी बेसिन यहां है, लगभग सभी नदियां वर्षा आधारित है। बरसात के पानी को संग्रहण करने के लिए आर्थिक सहयोग की जरूरत है। राज्य सरकार अपने बूते बड़ी परियोजनाओं को नहीं तैयार कर सकती है। वर्षा पानी के संग्रहण के लिए आर्थिक सहायता भी मांगी जाएगी। जलस्तर को मजबूत करने के लिए पैसे की जरूरत होगी। यदि इस पर केंद्र और राज्य सामूहिक रूप से ध्यान नहीं देंगे, तो अगले 20 वर्षों में राज्य में पेयजल के लिए हाहाकर मच जाएगा। जल संचयन की योजनाओं के लिए केंद्र और आयोग से राशि की मांग की जाएगी।

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