रातापानी टाइगर रिजर्व में नजर आए बाघ के दुश्मन ढोल:सोशल मीडिया पर साझा हुई तस्वीरें; 2026 की छठी प्रजाति, जो कैमरे में रिकॉर्ड

भोपाल से सटे रातापानी टाइगर रिजर्व में गुरुवार को संकटग्रस्त (एंडेंजर्ड) प्रजाति के वन्य प्राणी ढोल डॉग की साइटिंग हुई है। इसकी तस्वीर शुक्रवार को रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई। टाइगर रिजर्व अधिकारियों के अनुसार, जंगल के दृष्टिकोण से यह बेहद सकारात्मक संकेत है। इससे आने वाले समय में न केवल टाइगर रिजर्व की जैव विविधता में वृद्धि होगी, बल्कि भोपाल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे रातापानी टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना है। साल 2026 में अब तक यह छठी वन्य प्राणी प्रजाति है, जो कैमरे में कैद हुई है। इससे पहले बाघ, भालू, भेड़िया, तेंदुआ, गिद्ध और कई दुर्लभ पक्षी भी वन्यजीव प्रेमियों, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स और वन विभाग के स्टाफ के कैमरों में कैद हो चुके हैं। बाघ का शिकार छीनने के लिए मशहूर हैं ढोल
ढोल एशियाई जंगली कुत्ते की प्रजाति है। यह लाल-भूरे रंग का, फुर्तीला और सामाजिक जानवर है। जो 14 से 20 के झुंड में रहता है। यह IUCN की रेड लिस्ट में यानी लुप्त-प्राय के रूप में सूचीबद्ध हैं। यह बड़े खुरदार जानवरों जैसे हिरण और सांभर का शिकार करते हैं। कभी-कभी बाघों या भालुओं से भी शिकार छीन लेते हैं। इसी वजह से वन्यप्राणी प्रेमियों में इनको लेकर खासा इंट्रेस्ट है। 198 प्रजाति के पक्षी मिले
रातापानी टाइगर रिजर्व में हाल ही में कराई गई पक्षी गणना में 198 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए हैं। इससे पहले जनवरी 2022 में हुई गणना में 150 प्रजातियां दर्ज की गई थीं। बाघ और तेंदुओं के लिए पहचाने जाने वाला यह रिजर्व अब पक्षियों की समृद्ध विविधता के कारण भी चर्चा में है। गणना के दौरान साइबेरियन सहित कई प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी सामने आई है, जिससे यह क्षेत्र बर्ड वॉचर्स के लिए नए आकर्षण के रूप में उभरा है। रातापानी क्षेत्र में मौजूद जानवर
रातापानी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में चीतल, लंगूर, नीलगाय, चौसिंगा, काला हिरण, लकड़बग्गा, सियार, लोमड़ी, तेंदुआ, भालू, ढोल, टाइगर और 198 प्रजाति के पक्षी मौजूद हैं। 200 से ज्यादा तेंदुए होने की आशंका
रातापानी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार लगभग 80-90 बाघ हैं। वहीं, तेंदुए की संख्या 200 के करीब है। खास बात यह है कि तेंदुओं की कुल आबादी में से 75 फीसदी बफर जोन में है। बेहद फुर्तीले और पेड़ों पर आराम करने की फितरत के कारण यह इंसानों की नजरों से बचे रहते हैं।

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