भास्कर न्यूज | पलारी ग्राम डोटोपार में भक्त मां कर्मा प्रांगण में तीन दिवसीय रात्रिकालीन रामलीला का आयोजन किया गया। इसका मंचन सत्य साई रामलीला मंडली बेलौदी ने किया। रामलीला की शुरुआत मंडली के अध्यक्ष भैयालाल ने बताया कि रामकथा की शुरुआत भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाकर की थी। यह कथा भगवान राम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा की गाथा है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों को भी स्थापित करती है। रामलीला के मंचन में भगवान राम के जन्म से लेकर वनवास, रावण वध और अयोध्या वापसी तक की घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की भाव-भंगिमा, संवाद और अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर दृश्य पर तालियों की गूंज सुनाई दी। ग्रामीणों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से नई पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। उद्घाटन अवसर पर ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष भैयालाल साहू, सचिव परमेश्वर कलिहारी, कोषाध्यक्ष चमपेश्वर लाल साहू, नम्मू राम साहू, इतवारी राम साहू ने किया। राम भक्त हनुमान ने माता सीता की खबर लाने के बाद लंका पर युद्ध की रणनीति बनाई। समुद्र से रास्ता देने के लिए प्रार्थना के बाद भी जब समुद्र ने नहीं सुनी तो क्रोध के बाद समुद्र ने रामेश्वरम का सुझाव दिया। वानर सेना ने समुद्र पर पुल बनाया, जिसके बाद लक्ष्मण और मेघनाथ के बीच युद्ध हुआ। मेघनाथ की ब्रह्मा शक्ति से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। हनुमान लंका से सुषेण वैद्य को लेकर आए, जिसने हिमालय से संजीवनी बूटी लाने को कहा है। राम भक्त हिमालय संजीवनी बूटी लेने गए तो वहां संजीवनी बूटी की पहचान न होने पर पूरे पर्वत को ही उठा लाए। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण के प्राण बचे जिसके बाद लक्ष्मण ने मेघनाथ को मार दिया। मंडली के कलाकारों को सम्मानित किया गया रामलीला के अंतिम दिन मेघनाथ वध, रावण वध, माता सीता की अग्नि परीक्षा, भरत मिलाप व भगवान राम के राज्याभिषेक का मंचन किया गया। इस दौरान सम्पूर्ण पंडाल में राम नाम के जयकारे गूंजते रहे। बच्चों और युवाओं में रामलीला को लेकर उत्साह देखा गया। आयोजन स्थल को रंग-बिरंगी लाइट से सजाया गया था। तीन रात तक चली रामलीला में हर दिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। आयोजन के समापन पर मंडली के कलाकारों को ग्रामवासियों ने सम्मानित किया। ग्रामीणों ने भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की बात की। रामलीला में दूरदेशी राम साहू, दुष्यंत कुमार साहू, अनूप राम साहू, मिलापा बाई, जनक दुलारी, कुमारी बाई साहू, निराशा साहू, हेमंत कुमार साहू, ढालेंद्र कलिहारी, चंद्रकला, एकनारायण कलिहारी का सहयोग रहा।


