अमृतसर| दमदमी टकसाल के प्रमुख ज्ञानी राम सिंह खालसा ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में बरी करने के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि जब से राम रहीम को बार-बार पेरोल मिलने लगी, तब से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि सरकारें और कानूनी सिस्टम उसका पक्ष ले रहे हैं। ज्ञानी राम सिंह ने कहा कि एक तरफ वह व्यक्ति है जिस पर गंभीर आरोप हैं और जिसे कानूनी राहत मिलती रही है, जबकि दूसरी तरफ ऐसे सिख कैदी हैं। जो धार्मिक मामलों से जुड़े मामलों में 3 दशकों से ज़्यादा समय से जेलों में बंद हैं। उन्होंने कहा कि कई सिख कैदियों की सज़ा पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो पेरोल दी जा रही है और न ही रिहा किया जा रहा है, बल्कि सच बोलने वालों को राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट के तहत असम की जेलों में भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में न्याय की समानता बहुत ज़रूरी है, लेकिन ऐसे फ़ैसले कानून के दोहरे मापदंडों की छाप छोड़ते हैं।


