भास्कर न्यूज | धौराभाठा घरघोड़ा क्षेत्र में एनटीपीसी की रायकेरा कोयला खनन परियोजना के विरोध में प्रभावित आठ गांवों का आंदोलन छठे दिन भी जारी रहा। तिलाईपाली, कधरमौहा, रामपुर सहित अन्य गांवों के किसान, महिलाएं और युवा शांतिपूर्ण हड़ताल पर बैठे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अधिकारी मौके पर आ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर लिखित या स्पष्ट निर्णय नहीं दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में ग्राम सभा की सहमति के बिना कार्य किया जा रहा है। यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति बाहुल्य है। पेसा कानून और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना अधिनियम 2013 के अनुसार ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। ग्रामीणों ने बताया कि एनटीपीसी ने 2 दिसंबर 2025 को एक स्पष्टीकरण पत्र जारी किया था। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को द्विपक्षीय बैठक हुई, लेकिन बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों की मांग है कि पुनर्वास अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार पुन: सर्वेक्षण किया जाए और नई कट ऑफ डेट तय की जाए। अभी 5 दिसंबर 2006 को कट ऑफ डेट माना गया है, जबकि खनन कार्य 2019 के बाद शुरू हुआ। इससे कई प्रभावित परिवार मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास से वंचित हो गए हैं। साथ ही ग्रामीणों ने तेंदूपत्ता कार्डधारी परिवारों को 5 लाख रुपए मुआवजा देने के आश्वासन, रोजगार के बदले वार्षिकी बेरोजगारी भत्ता और तेंदूपत्ता संबंधी लाभ के मुद्दे उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि इन घोषणाओं पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले ली गई सहमतियां बिना पूरी जानकारी दिए ली गईं।


