कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने समय-सीमा बैठक लेकर जिले के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने लंबित राजस्व मामलों, कॉल सेंटर की शिकायतों और डीईएएफ व निष्क्रिय बैंक खातों की स्थिति पर चर्चा की और तय समय में निराकरण करने के निर्देश दिए। इस दौरान कलेक्टर ने खुद फाइलेरिया-रोधी दवाई खाकर अभियान की शुरुआत की है। कलेक्टर ने कहा कि जिले में चल रहे सभी निर्माण कार्य जल्द पूरे किए जाएं और उनकी जानकारी प्रशासन को दी जाए। विभागों से प्राप्त पत्रों का समय पर जवाब देने और नए वित्तीय वर्ष के लिए कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। खुद फाइलेरिया रोधी दवा खाकर अभियान शुरू
उन्होंने अधिकारियों को जनता की शिकायतों को प्राथमिकता से निपटाने को कहा। साथ ही डीईएएफ और निष्क्रिय खातों के मामलों को भी गंभीरता से लेकर तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और निगम आयुक्त विश्वदीप सहित अन्य अधिकारियों ने फाइलेरिया रोधी दवा खाकर जिले में अभियान की शुरुआत की। इस दौरान एडीएम उमाशंकर बंदे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है फाइलेरिया
फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है, जो मच्छर के काटने से फैलती है। इसके कारण फ्लूइड रिटेंशन हो सकता है यानी शरीर के किसी हिस्से में फ्लूइड जमा हो सकता है। कई मामलों में तो इससे विकृति या विकलांगता भी हो सकती है। इस बीमारी से जो अंग प्रभावित होता है, वह सूजकर भारी-भरकम हो जाता है। आमतौर पर इसके चलते पैर का आकार बहुत भारी हो जाता है। यही कारण है कि इसे एलिफेंटियासिस या हाथी पांव बीमारी भी कहते हैं। सामान्य बोलचाल की भाषा में लोग इसे फाइलेरिया कहते हैं। मौजूदा वक्त में भारत के 74 करोड़ लोगों को फाइलेरिया का रिस्क है।
फाइलेरिया होने पर हाथ-पैर बड़े क्यों होने लगते हैं? लिम्फेटिक सिस्टम हमारे शरीर का महत्वपूर्ण तंत्र है। यह टिश्यूज से अतिरिक्त पानी को निकालकर वापस ब्लड स्ट्रीम में ले जाता है। यह एक तरह की व्हाइट ब्लड सेल्स बनाता है, जो कीटाणुओं से लड़कर हमें बीमारियों से बचाती हैं। यह डाइजेस्टिव सिस्टम से फैट सॉल्यूबल विटामिन और प्रोटीन एब्जॉर्प करके उसे ब्लड स्ट्रीम में भेजता है। यह हमारे ब्लड से वेस्ट प्रोडक्ट को ट्रांसपोर्ट करता है। इसे किडनी यूरिन के जरिए बाहर निकालती है। लिम्फेटिक सिस्टम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में बनाए रखने में मदद करता है। इस सिस्टम के खराब होने से इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है। टिश्यूज में पानी भरने लगता है। इसके कारण इन्फेक्शन और एलर्जी का जोखिम बढ़ जाता है और इन्फेक्टेड अंगों में सूजन बढ़ने से उनका आकार बढ़ने लगता है।


