सुबह का समय, खेतों पर हल्की धूप और आसमान में उड़ता एक ड्रोन। कुछ ही मिनटों में पूरा खेत कीटनाशक से सुरक्षित हो जाता है। खेत के किनारे खड़ी एक महिला रिमोट से ड्रोन नियंत्रित करती दिखाई देती है। यह नज़ारा रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के ग्राम नगपुरा की ड्रोन दीदी चंद्रकली वर्मा के रोज़मर्रा के काम का हिस्सा है। नवंबर 2023 में नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़ने के बाद चंद्रकली वर्मा ने आधुनिक तकनीक के साथ काम शुरू किया। दिसंबर 2023 में प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने ड्रोन से खेतों में कीटनाशक छिड़काव का काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने अपने गांव और आसपास के कुछ खेतों में ही कीटनाशक छिड़काव की सेवा दी।
10 मिनट में एक एकड़ खेत में छिड़काव
धीरे-धीरे किसानों को इसका फायदा समझ में आने लगा। जहां पहले मजदूरों से छिड़काव करने में काफी समय लगता था, वहीं ड्रोन से केवल 10 मिनट में एक एकड़ खेत में कीटनाशक का छिड़काव हो जाता है। इससे किसानों का समय और श्रम दोनों बचता है और दवा भी सही मात्रा में खेतों तक पहुंचती है।
अब 70 गांवों के किसानों की मदद किसानों के बीच ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव की मांग तेजी से बढ़ी। आज चंद्रकली वर्मा करीब 40 किलोमीटर के दायरे में 70 गांवों के किसानों को ड्रोन से छिड़काव की सुविधा दे रही हैं। खरीफ और रबी सीजन में काम ज्यादा होने पर उन्हें कई बार दिन में दो शिफ्ट में भी काम करना पड़ता है।
सीजन में डेढ़ लाख रुपए तक कमाई ड्रोन से छिड़काव के लिए उन्हें प्रति एकड़ लगभग 300 रुपए मिलते हैं। काम बढ़ने के साथ उनकी आय भी बढ़ी है और अब वे एक सीजन में करीब डेढ़ लाख रुपए तक कमा लेती हैं। बढ़ते काम को संभालने के लिए उन्होंने अपने साथ तीन लोगों को भी रोजगार दिया है।
घर की जिम्मेदारियों के साथ करती है काम चंद्रकली घर की जिम्मेदारियों के साथ अपने काम को भी संभालती हैं। सुबह घर का काम निपटाने के बाद वे खेतों की ओर निकल पड़ती हैं। उनका कहना है कि ड्रोन तकनीक ने उनकी जिंदगी बदल दी है। इससे उनकी आय बढ़ी है और किसानों को भी आधुनिक खेती का फायदा मिल रहा है।
अब जानिए ड्रोन दीदी योजना के बारे में 2022 में नमो ड्रोन स्कीम शुरू हुई थी नमो ड्रोन दीदी स्कीम की शुरुआत 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसके तहत 1 लाख महिलाओं को अगले 5 सालों में ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया। इस योजना को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए लागू किया गया। सरकार का कहना है कि इस स्कीम का मकसद महिलाओं को सशक्त बनाना है। उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है। यह स्कीम कृषि में लगने वाली लागत में कमी ला सकती है। इससे रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।


