रायपुर जिला प्रशासन और रेड क्रॉस सोसाइटी जिला शाखा रायपुर ने मिलकर प्रोजेक्ट सुरक्षा के तहत जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में हुए इस प्रशिक्षण में 47 रोजगार सहायकों को प्राथमिक उपचार किट का सही उपयोग और सीपीआर (हृदय पुनर्जीवन) की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण का संचालन रेड क्रॉस सोसाइटी के सहायक प्रबंधक देवप्रकाश कुर्रे ने किया। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में तुरंत और सही प्राथमिक उपचार कितना जरूरी होता है। उन्होंने सीपीआर करने की पूरी प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया, ताकि सभी प्रतिभागी इसे सही तरीके से समझ सकें और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकें।
हार्ट अटैक आने पर क्या किया जाए उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी व्यक्ति की सांस रुक जाए या दिल की धड़कन बंद हो जाए तो घबराने की बजाय तुरंत सीपीआर देना चाहिए। सही समय पर दी गई मदद से किसी की जान बचाई जा सकती है। जिला प्रशासन ने इस पहल को जनहित में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आगे भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि शासकीय कर्मचारी आपात स्थिति में मदद के लिए तैयार रहें।
युवाओं में हार्ट अटैक के क्या फैक्टर्स हैं? तंबाकू का उपयोग हार्ट की बीमारी के होने के सबसे बड़े खतरे वाले फैक्टर्स में से एक है। 30 से 44 आयु वर्ग के लोगों में 26% हार्ट की बीमारी तंबाकू के उपयोग के कारण होती हैं। साथ ही खराब नींद पैटर्न और तनाव से यह स्थिति और भयावह हो जाती है। भारत में 70 मिलियन से ज्यादा लोगों को डायबिटीज है। इसमें बहुत सारे युवा लोग भी शामिल है। इससे हार्ट अटैक का खतरा भारतीय आबादी में बढ़ जाता है। हार्ट अटैक से कैसे बचें युवा? लाइफ स्टाइल में बदलाव से प्रीमैच्योर हार्ट अटैक का रिस्क काफी कम किया जा सकता है। वॉकिंग, साइकिलिंग, जॉगिंग और स्विमिंग करने से हार्ट अटैक का खतरा 30% तक कम हो जाता है। रोजाना कम से कम 10 हजार स्टेप्स पैदल चलना चाहिए। जंक फूड की बजाय हेल्दी फूड खाना चाहिए, जिसमें सब्जी, फल, मेवे, सोया और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल हों। फास्ट फूड, चिप्स, बिस्किट वगैरह में ट्रांसफैटी एसिड इस्तेमाल होता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए। तंबाकू और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। टाइम मैनेजमेंट सीखना चाहिए। आजकल लोग लैपटॉप और डेस्क पर ज्यादा वक्त बिताते हैं इसलिए योग और एक्सरसाइज दिल के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसके अलावा एहतियात बहुत जरूरी है। युवाओं को नियमित रूप अपने दिल की जांच करवानी चाहिए, जिससे समय रहते ब्लॉकेज का पता चल सके।


