देश में अपनी विशेष पहचान बना चुके राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विश्वविद्यालय जयपुर में आयुर्वेदिक दवाओं जैसे अवलेह, भस्म, चूर्ण, वटी, कैप्शूल, गुग्लू, क्वाथ या काढ़ा, सीरप और च्यवनप्राश के निर्माण की प्रक्रिया से लेकर जांच और औषधालयों में आपूर्ति करने तक का पाठ पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा क्वालिटी से युक्त दवाओं की पैकिंग, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट के साथ-साथ दवा देने पर पेशेंट काउंसलिंग, डोज लेने का तरीका का भी गहन अध्ययन करवाया जाएगा। संस्थान ने आयुर्वेद में बैचलर इन फार्मेसी एवं मास्टर इन फार्मेसी का नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की तैयारी कर ली है। सिलेबस के लिए गठित कमेटी गुजरात की जामनगर स्थित विवि और बनारस हिन्दू विवि एवं अन्य राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों का अध्ययन कर रही है। एनआईए जयपुर की एक्जीक्यूटिव काउंसिल में आयुर्वेद में बी-फार्मा एवं एम-फार्मा कोर्सेज के लिए सदस्यों की ओर से अनुमोदन किया जा चुका है। संभवतया अगले सत्र 2027-28 से कोर्सेज प्रारंभ किया जा सकेगा। हालांकि फीस और सीटों की संख्या का उच्च स्तरीय मीटिंग में निर्णय लिया जाएगा। एनआईए जयपुर की हकीकत


