तहसील बाड़मेर के राजस्व ग्राम सोखरु में नाडियों की आगोर एवं बहाव क्षेत्र से जुड़ी चारागाह भूमि का वर्गीकरण परिवर्तन कर विद्युत सब स्टेशन निर्माण के लिए आवंटन किए जाने के बाद क्षेत्र में विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि इस निर्णय से पर्यावरणीय संतुलन, पशुधन संसाधनों तथा ग्राम सभा के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जिला कलेक्टर बाड़मेर के आदेश के तहत वर्गीकरण परिवर्तन कर 765/400/220 केवी विद्युत सब स्टेशन निर्माण के लिए मैसर्स पावर ग्रिड बाड़मेर-1 ट्रांसमिशन लिमिटेड को कीमतन आवंटित किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आवंटित भूमि तीन नाडियों की वास्तविक आगोर भूमि है, जो राजस्व रिकॉर्ड में गैर मुमकिन गोचर के रूप में दर्ज है। इन नाडियों का जल बहाव खसरा संख्या 293/232, 295/232 एवं 230 स्थित गैर मुमकिन नाडी में पहुंचता है तथा अतिरिक्त पानी रेडाणा के रण तक जाता है। बरसात के मौसम में यह क्षेत्र मिनी गोवा के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन जाता है। ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित निर्माण स्थल नाडियों के अत्यंत समीप है, जिससे जलागम क्षेत्र प्रभावित होने तथा वर्षा जल संचयन बाधित होने की आशंका है। वर्तमान में राणीयाई नाडी में वर्षभर जल भंडारण बना रहता है, जिस पर आसपास के लगभग 50 गांवों का पशुधन निर्भर है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित ग्राम पंचायतों दूदाबेरी एवं सेजुओं की ढाणी की ग्राम सभाओं से विधिवत अनापत्ति नहीं ली गई, जो पंचायतीराज अधिनियम का उल्लंघन है। राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक एवं मानवाधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवानसिंह लाबराऊ ने राज्य सरकार से भूमि आवंटन पर पुनर्विचार करते हुए परियोजना के लिए वैकल्पिक स्थान चयन की मांग की है, ताकि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण एवं पशुधन हित सुरक्षित रह सकें।


