डीडवाना के राजकीय बांगड़ कॉलेज में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के मौके पर एक विशेष कार्यक्रम और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “विज्ञान में महिलाएं: नवाचार के भविष्य को आकार देती हुई” रखी गई, जिसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को उजागर करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रिंसिपल मनीषा गोदारा ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की वैज्ञानिक परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों और संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये परंपराएं आधुनिक शोध और नवाचार की आधारशिला रही हैं। संगोष्ठी में डॉ. चेना राम ने भारत के महान वैज्ञानिकों के जीवन संघर्ष और उनकी उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. अनिल कुमार और प्रो. सूर्यकांत ने भौतिकी में सी. वी. रमन द्वारा प्रतिपादित ‘रमन प्रभाव’ की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने समझाया कि प्रकाश के प्रकीर्णन की इस खोज ने विज्ञान को नई दिशा दी। डॉ. हितेश सोनी ने विज्ञान और नवाचार में महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं अंतरिक्ष, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं। इसके अतिरिक्त प्रो. वीरेंद्र कुमार, प्रो. छोटाराम मेघवाल, प्रो. चंद्र भान जाट, प्रो. आशीष जिंजवाड़िया और प्रो. कैलाश राठौड़ ने भी विज्ञान के सामाजिक और व्यावहारिक महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर महाविद्यालय में एक निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे: प्रथम स्थान हेमंत कंवर को मिला, जबकि शमीम और नेहा बिदावत संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं। ऐश्वर्या शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। सभी विद्यार्थियों से जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।


