दिल्ली में संसद के बाहर आज कांग्रेस के सीनियर नेता राहुल गांधी और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू में तीखी बहस हुई। राहुल गांधी ने उन्हें ‘गद्दार दोस्त’ कह डाला। जवाब में रवनीत बिट्टू ने भी राहुल गांधी को ‘देश का दुश्मन’ कहा। इसका वीडियो सामने आते ही वायरल हो गया। हालांकि राहुल गांधी ने बिट्टू को लेकर इतने तीखे शब्दें क्यों यूज किए, इसकी भी लंबी कहानी है। बिट्टू कभी कांग्रेस में राहुल गांधी के करीबियों में से एक थे। वह यूथ कांग्रेस के प्रधान भी बने। इसके बाद 3 बार वह कांग्रेस की टिकट से सांसद चुने गए। हालांकि 2024 में अचानक उन्होंने अपना सियासी भविष्य देखते हुए कांग्रेस छोड़ दी और BJP जॉइन कर लिया। हालांकि वह लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। इसके बावजूद सिख चेहरा होने की वजह से भाजपा ने हार के बावजूद उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया। अब पंजाब में वह BJP के मजबूत नेताओं में से एक बन गए हैं। राहुल गांधी के करीबी से लेकर बिट्टू को गद्दार बताने तक के बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए, रवनीत बिट्टू कौन हैं?
रवनीत बिट्टू पंजाब के सियासी परिवार से संबंध रखते हैं। उनके दादा बेअंत सिंह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वह 1991-1995 के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। उन पर आरोप लगे थे कि 80 के दशक में पंजाब में उठे आतंकवाद के दौर को कुचलने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। इसी वजह से खालिस्तानी आतंकी उनसे खुन्नस रखते थे। इसी की रंजिश में 1995 में खालिस्तानी आतंकियों ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब सचिवालय में उन्हें मानव बम से उड़ा दिया था। इसके अलावा बिट्टू के पिता स्वर्णजीत सिंह कांग्रेस से जुड़े रहे। हालांकि वह लोकल राजनीति के साथ कृषि में ज्यादा एक्टिव थे। बिट्टू के चचेरे भाई गुरकीरत सिंह कोटली भी कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं। वह अब भी कांग्रेस में हैं। राहुल गांधी के करीबी थे, प्रधान तक बनाए राहुल गांधी हमेशा से पार्टी में युवाओं को आगे लाने की कोशिश में रहे। इसी वजह से रवनीत बिट्टू भी उनके करीबियों में शुमार हो गए। इसके बाद उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए 2008 में पंजाब में यूथ कांग्रेस का प्रधान बनाया गया। उस वक्त वह पार्टी में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधान थे। राहुल गांधी की ही यह योजना थी कि पार्टी के चुनाव वोटिंग के जरिए हों। जिसे बिट्टू ने कामयाब भी किया और 4 लोग यूथ कांग्रेसियों ने इसमें वोटिंग की। बिट्टू 2008 से 2009 तक इस पद पर रहे। लोकसभा की टिकट दी, 33 साल में सांसद बने
2007 में एक्टिव पॉलिटिक्स में आए रवनीत बिट्टू के राहुल के करीबी होने का फायदा उन्हें कांग्रेस के भीतर मिलता रहा। वह यूथ कांग्रेस के प्रधान बने ही थे कि 2009 में कांग्रेस ने उन्हें श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से सांसद चुनाव की टिकट दे दी। बिट्टू चुनाव लड़े और 33 साल की उम्र में सांसद बन गए। राहुल गांधी ने बिट्टू को पगड़ी पहनने के लिए प्रेरित किया
रवनीत बिट्टू एक इंटरव्यू में खुद बताते है कि शुरूआती दिनों में वह पगड़ी तक नहीं पहनते थे। मगर राहुल गांधी ने उन्हें पगड़ी पहनने के लिए प्रेरित किया था। जिसके बाद उन्होंने पगड़ी बांधनी शुरू की। यह बात कांग्रेस के प्रधान राजा वड़िंग भी कहते हैं कि बिट्टू को राजनीति में लाने से लेकर पगड़ी पहनाने तक में राहुल गांधी का बड़ा रोल है। मगर, बिट्टू ने हर बार धोखा दिया। उनके दादा भी कांग्रेस में रहे और उन्हें मुख्यमंत्री भी बनाया। वह आखिरी सांसद तक कांग्रेस में रहे। 3 बार कांग्रेस की टिकट पर सांसद बने
रवनीत सिंह बिट्टू कुल 4 बार सांसद बन चुके हैं। वे 3 बार लोकसभा सांसद चुने गए। उन्होंने पहला इलेक्शन कांग्रेस की टिकट पर 2009 में श्री आनंदपुर साहिब से जीता, 2014 और 2019 में लुधियाना से सांसद बने। 2024 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और बीजेपी में शामिल हो गए। लुधियाना से चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। हालांकि BJP की अगुआई वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बना दिए गए। इसके बाद BJP ने अगस्त 2024 में उन्हें राजस्थान से राज्यसभा में भेजा। ***************
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