रिटायर्ड कर्नल को 24 घंटे की ‘डिजिटल गिरफ्तारी’:बैंक-पुलिस की सतर्कता से लाखों की ठगी से बचे, डर के मारे किसी को नहीं बताया

उज्जैन में साइबर ठगों ने सेना के एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के नाम पर लाखों रुपए की ठगी का प्रयास किया। 83 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल गंगा राम वर्मा और उनकी पत्नी को सीबीआई, मुंबई पुलिस और ईडी के अधिकारी बनकर डराया गया। हालांकि, बैंक अधिकारियों और पुलिस की सतर्कता से यह बड़ी ठगी टल गई। लेकौड़ा गांव निवासी रिटायर्ड कर्नल वर्मा को मंगलवार को एक कॉल आया। कॉलर ने बताया कि उनके नाम से एक अन्य मोबाइल नंबर से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। विरोध करने पर कॉल को कथित ‘मुंबई पुलिस स्टेशन’ से जोड़ा गया, जहां से एक व्यक्ति ने खुद को अधिकारी बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट से वारंट जारी होने, सीबीआई जांच और तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी। ठगों ने दावा किया कि कर्नल वर्मा के केनरा बैंक खाते से 247 लोगों के साथ 2.5 करोड़ रुपए का फ्रॉड हुआ है, जबकि उनका उस बैंक में कोई खाता नहीं था। लगातार वीडियो कॉल, धमकी भरे मैसेज और फर्जी दस्तावेज भेजकर दंपति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया। बदनामी के डर से उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। बुधवार को ठगों ने उनसे 3 लाख रुपए की मांग की और उन्हें एक अकाउंट में जमा कराने को कहा। डर के मारे रिटायर्ड कर्नल वर्मा एसबीआई की नई सड़क शाखा में आरटीजीएस कराने पहुंचे। उनकी घबराहट और लगातार आ रही कॉल्स देखकर सीनियर एसोसिएट प्रियांक को शक हुआ। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सीएसपी राहुल देशमुख, दीपिका शिंदे और माधव नगर थाना पुलिस बैंक पहुंची और एक घंटे तक कर्नल वर्मा को विश्वास में लेकर उनके मोबाइल की जांच की, जिसके बाद रकम ट्रांसफर रुकवाई गई। एसपी प्रदीप शर्मा ने इस मामले का खुलासा किया। रिटायर्ड कर्नल वर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि बदनामी के डर से उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया था।

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