रिम्स में पिछले कई सालों से एमआरआई मशीन खराब है। करीब एक साल पहले नई मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। रिम्स प्रबंधन ने फिलिप्स कंपनी की मशीन लेने के लिए टेंडर फाइनल कर लिया। आस जगी कि जल्द ही रिम्स में एमआरआई जांच शुरू होगी। लेकिन, मंगलवार को हुई शासी परिषद (जीबी) की 59वीं बैठक में टेंडर रद्द करने का फैसला लिया गया। साथ ही, फिलिप्स कंपनी की बजाय सीमेंस कंपनी की मशीन खरीदने का निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिया गया। कारण बताया गया कि जिस कंपनी के साथ टेंडर फाइनल किया गया है, उससे मशीन खरीद में काफी समय लग रहा है। ऐसे एमआरआई जांच के लिए नई मशीन खरीदने की फिर से शुरू होगी और मरीजों को 8 माह का इंतजार करना पड़ सकता है। बता दें कि रिम्स में एमआरआई जांच का शुल्क 1500 से 2500 रु. है। वहीं निजी जांच घर में 5 से 10 हजार रुपए तक लगते हैं। रिम्स की शासी परिषद की बैठक में 37 एजेंडों पर चर्चा हुई। 22 एजेंडे पर सदस्यों की सहमति बनी। शेष पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया गया। झारखंड में पहली बार ऐसी सुविधा रिम्स में निधन पर अंतिम संस्कार किट, मुफ्त में मोक्ष वाहन मिलेगा जीबी ने फैसला लिया है कि अब रिम्स में इलाज के दौरान मरने वाले सभी मृतक के परिजनों को मुफ्त मोक्ष वाहन की सुविधा दी जाएगी। अभी रिम्स के पास पांच मोक्ष वाहन हैं। जिसे बढ़ाकर 10 किया जाएगा। जल्द ही 5 मोक्ष वाहन की खरीदारी की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके अलावा ऐसा पहली बार होगा जब मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में मरने वाले मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार करने के लिए सहायता दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रिम्स में जिनकी भी मौत होगी, सभी को पांच हजार मूल्य का अंतिम संस्कार किट दिया जाएगा। जिसमें कफन, इत्र से लेकर क्रियाक्रम संबंधित सभी सामान मौजूद होंगे। उलझे स्वास्थ्य सचिव और रिम्स निदेशक…इस्तीफे की धमकी बैठक में एजेंडे पर चर्चा के दौरान रिम्स निदेशक डॉ. राज कुमार और अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह उलझ गए। निदेशक ने इस्तीफा देने की धमकी दे दी। मंत्री इरफान अंसारी के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ। दरअसल, हेल्थमैप और मेडॉल जांच घर के लंबित भुगतान का एजेंडा भी था। निदेशक ने कहा कि कंपनी का एमओयू रिम्स से नहीं स्वास्थ्य विभाग से हुआ है। इसलिए भुगतान स्वास्थ्य विभाग को करना चाहिए। इसपर सचिव ने कहा कि रिम्स और शासी परिषद सरकार से बड़ा है क्या। पैसा क्यों नही दिया जाना चाहिए। निदेशक ने बताया कि बिल में गड़बड़ी है,इसलिए मैं भुगतान नही करूंगा। अगर आप कर सकते हैं तो आप कर दीजिए। इसपर विवाद बढ़ गया। निदेशक ने कहा कि अगर आपको लगता है कि मैं गड़बड़ कर रहा हूं, तो हटा दीजिए। मैं इस्तीफा दे देता हूं। मैं भी अबतक कई जीबी करा चुका हूं। दो-दो इंस्टीट्यूट खड़ा कर चुका हूं। इसपर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि आप किस भाषा में बात कर रहे हैं, इसका ख्याल करें। डॉक्टरों के प्रमोशन का मामला लटका: रिम्स के सौ से ज्यादा डॉक्टरों का प्रमोशन इंटरव्यू पिछले साल नवंबर में हुआ था। छह माह बाद भी प्रोन्नति का रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। परिणाम प्रकाशन से संबंधित मामले को एजेंडा बनाकर जीबी की बैठक में शामिल किया गया था। चिकित्सकों को आस थी कि इसपर निर्णय होगा। लेकिन, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कुछ विसंगतियां रह गई थीं, इसलिए गठित समिति के पास मामला भेजा गया है। समिति निर्णय लेकर फाइल भेजेगी इसके बाद इसपर निर्णय लिया जाएगा।


