रिसाली में महापौर निधि पर सियासी संग्राम:भाजपा ने लगाए अनियमितता के आरोप, महापौर ने किया पलटवार

दुर्ग जिले के रिसाली नगर निगम में महापौर निधि के उपयोग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी चुनावी साल को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा पार्षदों ने महापौर निधि में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दुर्ग कलेक्ट्रेट में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। वहीं, महापौर शशि सिन्हा ने इन आरोपों को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए खारिज कर दिया है। रिसाली नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शैलेंद्र साहू ने महापौर निधि के पारदर्शी उपयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग चार वर्षों के कार्यकाल में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के पार्षदों को पर्याप्त निधि आवंटित नहीं की गई है। साहू ने यह भी पूछा कि महापौर का वार्ड बीएसपी क्षेत्र में आता है, जहां सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं का रखरखाव पहले से ही बीएसपी प्रबंधन द्वारा किया जाता है। ऐसे में महापौर निधि का उपयोग किन कार्यों में हो रहा है, इसका हिसाब दिया जाना चाहिए। भाजपा पार्षद बोले- महापौर निधि के काम दिखते नहीं, जांच की मांग भाजपा पार्षदों का कहना है कि निगम को हर साल करीब डेढ़ करोड़ रुपए की महापौर निधि मिलती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि चुनिंदा एजेंसियों को लगातार काम देकर पक्षपात किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ रही है। भाजपा पार्षदों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और कार्यों के सत्यापन की मांग की है। महापौर ने भाजपा के आरोपों को बेबुनियाद बताया महापौर शशि सिन्हा ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि महापौर निधि का उपयोग 40 वार्डों के विकास कार्यों के लिए किया जाता है। पार्षदों द्वारा जहां-जहां लिखित मांग की गई, वहां कार्य कराए गए हैं। सिन्हा ने उदाहरण देते हुए बताया कि नेता प्रतिपक्ष के वार्ड में भी चार लाख रुपए के विकास कार्य हुए हैं। इसके अलावा, अन्य वार्डों में भी स्कूलों और सामुदायिक भवनों के लिए निधि आवंटित की गई है। महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि 2024 में निधि संबंधी तकनीकी बदलाव के बावजूद विकास कार्य जारी रखे गए और 2025 में प्राप्त फंड का नियमानुसार वितरण किया गया। उनके अनुसार, एजेंसियों का चयन कार्य गुणवत्ता और क्षमता के आधार पर किया जाता है, न कि किसी निजी लाभ के लिए। राजनीतिक विवाद की संभावना 40 वार्डों वाले निगम में भाजपा के 21 और कांग्रेस के 19 पार्षद होने के कारण सियासी संतुलन पहले से ही नाजुक बना हुआ है। ऐसे में यह विवाद आगामी निगम चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।

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