रिहाई के बाद राजपाल यादव ने लगाई काम की गुहार:बोले- मुझे अच्छे रोल्स की तलाश है, जो फीस तय करेंगे, उसमें काम करूंगा

राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में 30 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है। जेल से बाहर आने के बाद एक्टर ने सभी का धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से काम की अपील भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें एक बार फिर अच्छे रोल देकर उनका साथ दिया जाए। राजपाल यादव ने इंडिया टीवी से बातचीत में सबसे पहले लोगों से जो उन्हें सपोर्ट मिला उसका उन्होंने धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, आपके सपोर्ट के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। बच्चों से लेकर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों तक मुझे इंडियन सिनेमा में अपने पूरे सफर में बहुत प्यार मिला है और मैं इसके लिए सभी का बहुत शुक्रगुजार हूं। राजपाल यादव ने कहा, मुझे इंडस्‍ट्री में अच्‍छे रोल्‍स की जरूरत है। जिन लोगों ने पहले मेरी मदद की है, मेरा साथ दिया है, मैं उनसे रिक्वेस्ट करता हूं कि वे एक बार फिर उन रोल में मेरी मदद करें जो मैं करना चाहता हूं। इसके लिए जो भी फीस वो लोग तय करेंगे मैं काम करने के लिए तैयार हूं। मैं हर एक आशीर्वाद की वजह से आगे बढ़ा हूं। मैं उन लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर मेरा साथ दिया और मैं उन लोगों का भी शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने मेरी बुराई की। क्यों जेल में बंद थे राजपाल यादव? साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। ये फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टी के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया।

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