सिटी रिपोर्टर | बोकारो सेक्टर-3 चक्की मोड़ स्थित दुर्गा पूजा मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। वृन्दावन से पधारे पूज्य सुधांशु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक प्रवचन प्रदान किया। उनके ओजस्वी और सरल शब्दों ने पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श किया। पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति गीतों और मधुर भजनों से हुई। “मुझे अपना बना लो नंदलाल, पुजारी हूं मैं तेरे नाम का”, “जादू भरी तेरी आंखें जिधर गई तथा तू राधे राधे गा ले, छोटा सा घर बना ले जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भजनों की धुन पर महिलाएं और पुरुष झूमते नजर आए। भजनों का गायन अरुण जी, रविन्द्र जी एवं कंचन जी ने किया, जिनके मधुर स्वरों ने कार्यक्रम को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और विस्तृत वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि रुक्मिणी जी की अटूट श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्कलंक प्रेम हमें यह संदेश देता है कि जब भक्ति सच्ची और समर्पण पूर्ण होती है, तब ईश्वर स्वयं भक्त की रक्षा और कल्याण के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक बाधाएं आती हैं, किंतु जो व्यक्ति विश्वास और भक्ति का दामन नहीं छोड़ता, वह अंततः सफलता और शांति प्राप्त करता है। कथा श्रवण से मन शुद्ध होता है और जीवन को नई दिशा मिलती है। वर्तमान जीवन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि आज के युग में परिवारों में आपसी प्रेम, विश्वास और नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पहले से अधिक है। श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली प्रेरणा है। कथा श्रवण से समाज में सद्भाव और सकारात्मकता का संचार होता है। आकर्षक झांकियों और सजीव मंच सज्जा ने कथा को और अधिक प्रभावी बना दिया। पूरा क्षेत्र राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 23 फरवरी को संध्या 4:30 बजे से 8:30 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन होगा। समापन दिवस पर विशेष झांकियां, संकीर्तन और आरती का आयोजन किया जाएगा।


