भास्कर न्यूज|गुमला जशपुर रोड स्थित रेन हॉस्पिटल अब खुद सवालों के घेरे में है। अस्पताल पर सवा लाख रुपए की मांग को लेकर एक गंभीर मरीज को 3 दिन तक बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। घटना ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि मानवता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला 30 वर्षीय सोमा उरांव का है, जो तिरा पेट्रोल पंप के समीप का निवासी है। बताया जाता है कि 2 दिसंबर को वह अपने मित्र संजीव कुमार के साथ दहेज का सामान लेकर रांची जा रहा था। इसी दौरान रिंग रोड पर दो पिकअप वाहनों के बीच हुई जोरदार टक्कर में सोमा गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। घटना के बाद सोमा को इलाज के लिए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया, जहां वह एक सप्ताह तक इलाजरत रहा। वहां से छुट्टी मिलने के बाद उसे तेज हॉस्पिटल और फिर गुरुनानक अस्पताल ले जाया गया। लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इस दौरान परिजनों के ढाई लाख रुपए खर्च हो चुके थे। इसी बीच सोमा के दोस्त अमर बारला उसे गुमला स्थित रेन हॉस्पिटल लेकर आए। यहां भर्ती के नाम पर 10 हजार रुपए एडमिट चार्ज लिया गया और मरीज को सीधे आईसीयू में डाल दिया गया। परिजनों का आरोप है कि मरीज आईसीयू में रखने लायक नहीं था, फिर भी तीन दिनों तक वहीं रखा गया। जबड़े का सिटी स्कैन हुआ, जिसमें फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। इसके बाद ऑपरेशन और दिल्ली से डॉक्टर बुलाने की बात कहकर डेढ़ लाख रुपए की मांग की गई। परिजनों के अनुसार एक डॉक्टर अस्पताल पहुंचे भी, लेकिन 3 दिन बाद जब मरीज की पत्नी लक्ष्मी को अस्पताल के रवैये पर शक हुआ तो उसने डिस्चार्ज की मांग की। यहीं से असली खेल शुरू हुआ। अस्पताल प्रबंधन ने साफ कह दिया, डेढ़ लाख रुपए जमा किए बिना मरीज को नहीं छोड़ा जाएगा। गरीब पत्नी हाथ जोड़ती रही, रोती-बिलखती रही, लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा।
आरोपों को मैनेजर ने किया खारिज: वहीं अस्पताल के मैनेजर ने बंधक बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली से डॉक्टर बुलाया गया था और उसे भुगतान किया जा चुका था, इसलिए राशि की मांग की गई। मामला बढ़ने पर पत्नी ने डीसी को सूचना दी। मीडिया द्वारा एसपी, सीएस और एसडीओ को भी जानकारी दी गई। सीएस और एसपी के निर्देश पर सदर थाना प्रभारी अस्पताल पहुंचे और जांच की। जांच में कई गंभीर आरोप सही पाए गए। सीएस ने पाया कि जिस दिल्ली के डॉक्टर को बुलाने और भुगतान कर देने का हवाला देकर डेढ़ लाख रुपए की मांग की जा रही थी, उसका कोई अटेंडेंट अस्पताल में मौजूद ही नहीं था। सभी दस्तावेज जब्त कर विस्तृत जांच की बात कही गई है।


