नैनची बाग से कबीर नगर तक बनने वाले नाले की समस्याएं खत्म नहीं हो रही। 15 महीने में बनने वाला नाला 32 महीने बाद भी अधूरा पड़ा है। सूरसागर तिराहा पर नाले को क्रॉस कराना है, पर उसके लिए रेलवे की एनओसी चाहिए, क्योंकि रेलवे लाइन है। यह एनओसी अभी तक मिली नहीं है। जबकि रेलवे ने अपने ट्रैक के आसपास हुए सैकड़ों अवैध कब्जों पर कभी ध्यान नहीं दिया। इधर, पानी और बिजली की लाइन भी शिफ्ट नहीं होने से काम रुका पड़ा है। जोधपुर विकास प्राधिकरण की ओर से नाले का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस पूरे नाले के निर्माण में दो स्थानों पर ज्यादा अड़चन है। जिसमें एक जगह पर पानी और बिजली की लाइन को शिफ्ट करना है। इसमें पानी की लाइन के लिए 12 लाख और बिजली की लाइन शिफ्ट करने के लिए 31 लाख का डिमांड आ रखी है। जिस पर जेडीए की ओर से मंथन किया जा रहा है। इधर, सबसे बड़ी अड़चन है रेलवे से परमिशन लेना। क्योंकि रेलवे के पुराने ट्रैक के नीचे से नाला निकालना है। इस कार्य की एनओसी लेने के लिए जेडीए लंबे समय से प्रयासरत है। रेलवे लाइन के पास बन गए अवैध मकान हकीकत यह है कि रेलवे के इस ट्रैक के आसपास बड़ी संख्या में अवैध कब्जे हो रखे है। अतिक्रमणकारियों ने पूरे ट्रैक के पास ही मकान बना लिए है। इसके अलावा बड़ी संख्या में कार बाजार बन चुका है। साथ ही साथ कबाड़ियों ने डेरा डाल रखा है। रेलवे के आखलिया चौराहा से लेकर सूरसागर तक पूरे रूट के आसपास और ऊपर कब्जे हो चुके हैं। 2200 मीटर लंबा नाला 400 मीटर का अधूरा…2200 मीटर लंबे नाले का काफी काम हो चुका है। यूटिलिटी के कारण कार्य धीरे चल रहा है। यह शिफ्ट हो तो नाला बने। अब तक दो अलग-अलग जगह पर करीब 400 मीटर का काम अधूरा पड़ा है। बरसाती नाले पर 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे। दो स्थानों पर ज्यादा अड़चन है। जिसमें एक जगह पर पानी और बिजली की लाइन को शिफ्ट करना है। इसमें पानी की लाइन के लिए 12 लाख और बिजली की लाइन शिफ्ट करने के लिए 31 लाख का डिमांड आ रखी है। जिस पर जेडीए की ओर से मंथन किया जा रहा है। इधर, सबसे बड़ी अड़चन है रेलवे से परमिशन लेना। क्योंकि रेलवे के पुराने ट्रैक के नीचे से नाला निकालना है। इस कार्य की एनओसी लेने के लिए जेडीए लंबे समय से प्रयासरत है।


