रेलवे में भ्रष्टाचार: अफसरों की सेटिंग से फाइलें ठंडे बस्ते में, कार्रवाई के नाम पर हो रही है लीपापोती

भास्कर न्यूज | अमृतसर रेलवे में भ्रष्टाचार इस कदर जड़ें जमा चुका है कि अब अफसर भी इसे खत्म करने में नाकाम नजर आ रहे हैं। पिछले 45 दिनों में दो बड़े घोटाले सामने आए, लेकिन अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बजाय फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। पहले मामले में जेई ड्यूटी पर न होने के बावजूद मशीन से ट्रैक की जांच करवाई गई, मगर जेई पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दरअसल, यूएसएफडी विभाग का जूनियर इंजीनियर (जेई) ट्रेनिंग पर गया था और उसे 10 मार्च को दफ्तर रिपोर्ट करना था, लेकिन वह वापस नहीं लौटा। इसके बावजूद स्टाफ को बताया गया कि वह ड्यूटी पर आ चुका है और रेलवे ट्रैक चेक करने वाली मशीन लेकर भेज दी गई। 11 मार्च को ढिलवां और 12 मार्च को धारीवाल सेक्शन में मशीन से ट्रैक की जांच करवाई गई। जब असिस्टेंट डिवीजनल इंजीनियर (एईएन) ने दो ट्रैकमैनों से पूछताछ की, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। नतीजा यह हुआ कि एक ट्रैकमैन को सस्पेंड कर दिया गया और दूसरे को चार्जशीट थमा दी गई। जेई के खिलाफ जांच और कड़ी कार्रवाई करने की बजाय उसे सिर्फ तीन दिन की गैरहाजिरी लगाकर मामला निपटा दिया गया। वहीं, जिस ट्रैकमैन को सस्पेंड किया गया, उसे गैंगमैन बना दिया गया। दूसरा बड़ा मामला रेलवे स्टेशन के स्टोर रूम से 2,000 बेडशीट चोरी होने का है। 3 फरवरी को चोरी की यह वारदात हुई, लेकिन 17 दिन तक किसी को भनक तक नहीं लगी। सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (एसई) के लेटर से जब यह मामला उजागर हुआ, तो सीनियर डीएमई ने फिरोजपुर के डीएमई को जांच अफसर नियुक्त किया। 28 दिन बीतने के बाद भी न तो जांच पूरी हुई और न ही कोई कार्रवाई हुई। जब नए सीनियर डीएमई से इस मामले पर जवाब मांगा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। डीआरएम भी इस घोटाले पर कुछ कहने को तैयार नहीं हैं। रेलवे से जुड़े कई मामले उजागर कर चुके वरिष्ठ वकील पीसी शर्मा का कहना है कि बेडशीट चोरी मामले में एक्शन न होने से साफ है कि नीचे से ऊपर तक के अफसर मिले हुए हैं। 2 हजार बेडशीट की कीमत करीब 4 लाख रुपए है। अगर सही से जांच होती तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता था। मगर अंदरखाते सेटिंग कर मामला रफा-दफा कर दिया गया। इसी तरह जब जेई ही ड्यूटी से गायब था तो ट्रैकमैनों को सस्पेंड करना कहां तक सही है? जेई के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बजाय उसे ट्रैक पर मशीनें चलाने की अनुमति दी जा रही है। साफ जाहिर है कि या तो वह किसी अफसर का करीबी है या फिर यूनियन नेताओं का सपोर्ट प्राप्त है। रेलवे संपत्ति की चोरी हो रही है, जेई जैसे अफसर ड्यूटी से नदारद रहकर भी काम कर रहे हैं, मगर ऊपर से नीचे तक सभी अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। यह भ्रष्टाचार पर गहरे सवाल खड़े करता है।

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