कोटा के तीन मंजिला रेस्टोरेंट में मां और बेटा खाना खाने गए लेकिन वापस घर नहीं लौट सकें। रेस्टोरेंट ढहने से बेटे की मौत हो गई। वहीं मां घायल हो गई। उनका दो दिन पहले ही एक पैर भी काटना पड़ा। महिला के पति के पास इलाज के लिए भी पैसे खत्म होते जा रहे है। वहीं बेटी भी पढ़ाई छोड़कर मां की सेवा में लगी है। ये दर्द है, पश्चिम बंगाल में रहने वाले अभिजीत कर्माकर का। उनका बेटा अनारण्य दो साल से कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा था। मां सुदिप्ता भी उसके साथ देखभाल के लिए रहती थी। 7 फरवरी की रात इंद्र विहार इलाके में स्थित तीन मंजिला रेस्टोरेंट में दोनों खाना खाने गए थे। उस दौरान रेस्टोरेंट ढहने से दोनों मलबे में दब गए थे। अनारण्य की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं उनकी मां 16 दिन से हॉस्पिटल में भर्ती है। आठ लाख खर्च हो चुके, अब डर सताने लगा हादसे में घायल महिला सुदिप्ता तलवंडी स्थित निजी हॉस्पिटल में भर्ती में है। उनके पति अभिजीत (शिक्षा विभाग से रिटायर) और उनकी बेटी अद्रिका कर्मकार हादसे के दूसरे दिन कोटा आए थे। अभिजीत ने बताया कि पत्नी को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। डॉक्टर्स ने बताया कि उनकी हालत बहुत गंभीर है और पैर काटने की स्थित होगी। ऐसे में हम निजी हॉस्पिटल ले आए। सुदिप्ता की हालत अभी भी गंभीर ही बनी हुई है। उनके पैर और सिर में गंभीर चोट आई थी। पैर को बचाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन नाकाम रहे। पैर में इंफेक्शन होने की वजह से पैर को काटना पड़ा। दो दिन पहले ही सर्जरी हुई और पैर को काट दिया गया। उन्होंने बताया कि 16 दिन में उनके करीब 8 लाख खर्च हो चुके हैं। जो बचत के पैसे थे, उससे बेटा-बेटी को पढ़ा रहे थे। अब इलाज के लिए पैसे खत्म होने लगे है जबकि इलाज अभी बहुत होना बाकी है। हॉस्पिटल में कितने दिन रहना पडे़गा, आर्टिफिशियल पैर लगवाना, दवाईंयों का खर्चा सब है। इसी बात की चिंता है कि अब पत्नी का इलाज कैसे करवाए। पढ़ाई छोड़ मां की देखभाल कर रही बेटी घायल महिला की बेटी अद्रिका एमबीए की पढ़ाई कर रही है। हादसे के दूसरे दिन से वे कोटा में है। उन्होंने बताया कि मां की स्थिति खराब है, उनकी लगातार चिंता बनी हुई है। भाई को तो खो ही चुकी हूं, अब मां को लेकर टेंशन रहती है। इलाज के लिए प्रशासन को, यहां के नेताओं को कुछ तो मदद करनी चाहिए। कोटा में पढ़ने के लिए किसके भरोसे हमने भाई को भेजा था। आज उस परिवार को कोटा के लोगों की जरूरत है तो कोई आगे नहीं आ रहा है। हॉस्टल में रहने खाने के लिए मदद अभिजीत ने बताया कि जिस हॉस्टल में बेटा रहता था। उस हॉस्टल की तरफ से उनके अभी रहने और खाने के लिए व्यवस्था की गई है। बेटा एलन कोचिंग में पढ़ रहा था। उन्होंने बच्चे की फीस भी लौटा दी थी। पत्नी के लिए इलाज के लिए भी कोचिंग की तरफ से मदद की जा रही है। प्रशासन की तरफ से कोई सहायता आज तक नहीं मिली है। प्रशासन, एनजीओ या जनप्रतिनिधियों से अपील है कि हमारी मदद करें। ताकि इलाज में कोई परेशानी न आए। — हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए मलबे में दबे कर्मचारी ने फोन करके मदद मांगी:रेस्टोरेंट बिल्डिंग दिन में हिली, रात में ढही; मां के साथ आए स्टूडेंट की मौत कोटा में जिस रेस्टोरेंट के कारण हादसा वो अवैध:अब जर्जर इमारतों का होगा सर्वे, आरोप-अधिकारियों की लापरवाही के कारण बिल्डिंग गिरी


