मप्र में करीब 2000 पुलिसकर्मी (आरक्षक और प्रधान आरक्षक) म्यूचुअल (आपसी सहमति से) ट्रांसफर लेने के लिए तैयार हैं। इन्होंने जिलों में आवेदन भी किए हुए हैं, लेकिन बीते एक साल से इस पर अघोषित रोक लगी है। कुछ जिलों के एसपी ने आवेदन भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय भेज दिए। आरक्षकों ने जब ट्रांसफर न होने पर पूछा तो जवाब आया कि ऊपर से रोक लगी है। अहम बात तो ये कि जब आरटीआई लगाकर म्यूचल ट्रांसफर पर रोक के संबंध में आदेश की प्रति मांगी गई तो पुलिस मुख्यालय से न आदेश की प्रति दी गई और न ही संख्या। सिर्फ यह बताया कि स्थानांतरण नीति जीएडी पोर्टल डाउनलोड कर लें। पोर्टल पर जाकर जब दैनिक भास्कर ने आदेश चेक किया, तो वह सर्कुलर था, जिसमें किसी प्रकार की कोई रोक नहीं लगी है। आरटीआई के जवाब में पुलिस मुख्यालय की तरफ से ट्रांसफर के लिए जारी किए गए निर्देश की कॉपी दे दी गई। इसमें स्पष्ट लिखा है कि स्वयं के व्यय पर आपसी सहमति से होने वाले ट्रांसफर आवेदन में आवेदक के हस्ताक्षर हो और उसे कार्यालय प्रमुख से सत्यापित करवाया गया हो। लेकिन इसका भी पालन नहीं हो रहा है। कई आवेदन को एसपी ने सत्यापित कर दिया है। नियम यह है…
मप्र में वर्ष 2020 तक दो जिलों के एसपी की अनुशंसा से सीधे म्यूचुअल ट्रांसफर हो जाते थे। लेकिन इसके बाद नया नियम आया कि दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पहले पुलिस मुख्यालय भेजी जाए। इसके बाद यहां से ट्रांसफर आदेश होंगे। बड़ी बात यह है कि म्यूचल ट्रांसफर कभी भी हो सकते हैं। लेकिन बीते एक साल से कोई म्यूचल ट्रांसफर नहीं हुए हैं। इसको देखेंगे… विभागवार समीक्षा कर रहा हूं। इसका नंबर आएगा तो इसको देखेंगे।’ -कैलाश मकवाना, डीजीपी, मप्र पुलिस


