फिल्लौर के पास गांव गग ढंगारा से सिधवां बेट तक सतलुज किनारे अवैध खनन का बड़ा खेल चल रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि एक दिन में 500 से ज्यादा टिप्पर चारों तरफ से निकलते हैं और वह भी ओवरलोड, जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं। पुलिस की आंखों के सामने से ही ओवरलोड टिप्पर गुजरते रहते हैं। यहीं पर एक बिजली के टावर की नींव तक को भी खोद दिया गया है। जहां 220 केवी पोल खड़ा है, वहां पहले मजबूत मिट्टी का भराव था। खनन के चलते पोल के चारों तरफ की मिट्टी हट गई। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन स्ट्रक्चर की नींव से छेड़छाड़ पूरे ग्रिड पर असर डाल सकती है। लोगों की मांग है कि 220 केवी पोल की तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट किया जाए। सतलुज किनारे ड्रोन व रात को निगरानी होनी चाहिए, रेत माफिया के लोग जो धमकियां देते हैं, उसके बारे में पुलिस प्रशासन को पता भी है लेकिन कार्रवाई नहीं हो पा रही। गांव के चारों ओर कैमरे लगे हुए हैं। जैसे ही पुलिस या माइनिंग विभाग की टीम की आहट मिलती है, ट्रक मौके से गायब कर दिए जाते हैं। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों की शह के कारण कार्रवाई ठंडी पड़ी रहती है। अब ग्राउंड पर जाएंगे अफसर इसको लेकर भास्कर के सवाल पर माइनिंग विभाग के एक्सईएन अमरिंदर सिंह का कहना है कि अगर माइनिंग क्षेत्र के अलावा और अनुमति से ज्यादा माइनिंग हो रही है और उसके कारण बिजली के पोल को नुकसान हुआ है तो हम उसको मौके पर जाकर चेक करवाएंगे। यहां मरम्मत का काम भी जोखिम भरा यदि समय रहते फाउंडेशन मजबूत नहीं किया गया तो नुकसान गंभीर हो सकता है। लेकिन जिस स्थान पर पोल लगा है, वहां जाकर मरम्मत व मजबूती का काम करना भी रेत माफिया के कारण जोखिम भरा है। बारिश में ब्लैक आउट से बचने के लिए बिजली विभाग को करीब 10–15 दिन तक अस्थायी व्यवस्था से बिजली सप्लाई बहाल रखनी पड़ेगी। बरसात में डूबने के कगार पर दो गांव गांव ढंगारा और भुंदरी के ग्रामीणों का कहना है कि लगातार खनन से नदी का कटाव बढ़ गया है। मानसून में पानी का बहाव तेज होते ही गांवों के डूबने का खतरा मंडराने लगता है। खेतों में पानी भर जाता है और आबादी तक पानी पहुंचने की नौबत आ जाती है। रेत माफिया को रोकने पर लोगों को हथियारों के दम पर धमकाया भी जाता है।


