रोडवेज में ट्रांसफर के बाद 2 साल पुन: तबादला नहीं, पति-पत्नी को 1 जिले में लगाना प्राथमिकता

श्रीगंगानगर| राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की ट्रांसफर पॉलिसी में अहम बदलाव हुए हैं। रोडवेज में ट्रांसफर के बाद 2 साल तक पुनः तबादला नहीं होगा। निगम मुख्यालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्राथमिकता सूची में विधवा, एकल महिला व परित्यक्ता शामिल है। मानसिक दिव्यांग, ऑटिज्म व दृष्टिबाधित कर्मियों को भी राहत दी गई। वहीं, पारिवारिक परिस्थितियों को भी आधार बनाया गया है। निगम के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी कर बताया कि गंभीर बीमारियों व हार्ट सर्जरी जैसे मामलों को प्राथमिकता दी गई है। किडनी-लिवर डोनर कर्मियों को भी लाभ मिलेगा। स्थायी दिव्यांग कर्मियों के लिए विशेष प्रावधान लागू होंगे। गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। राजकीय/निगम सेवा में कार्यरत दंपत्तियों को भी बड़ी राहत दी गई है। अवयस्क संतानों की देखभाल वाले मामलों को भी वरीयता दी गई है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए विशेष नियम है। पति-पत्नी अलग जिलों में तैनात तो एक जिले में प्राथमिकता दी जाएगी। परिचालकों के लिए भी ट्रांसफर नीति में नए उप-बिंदु लागू किए हैं। ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। निलंबन अवधि पूरी होने पर ही अगला तबादला संभव है। 3 वर्ष तक उसी जोन में पुनः पोस्टिंग पर रोक है। रोडवेज एमडी पुरुषोत्तम शर्मा ने चालकों को भी बड़ी राहत दी है। पहली बार रोडवेज के चालकों को प्रमोशन का मौका दिया जा रहा है। रोडवेज प्रशासन ने इस संबंध मंे प्रस्ताव तैयार किया है। जिसमें 27 वर्ष की सेवा और 54 वर्ष की उम्र के आधार पर पदोन्नति हो सकेगी। चालक पदोन्नति के लिए 82 पद स्वीकृत किए गए हैं। मंजूरी के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है।

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