राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि कैसे जयपुर के बनीपार्क इलाके में दिनदहाड़े हिस्ट्रीशीटर अजय यादव को चाय की थड़ी पर मौत के घाट उतार दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर्स भीड़भाड़ वाले इलाके से आसानी से फरार भी हो गए। पुलिस ने इस हत्याकांड के दस दिन बाद ही हत्या के आरोपियों की मदद करने वाले 2 बदमाशों को पकड़ लिया। वहीं हत्याकांड में शामिल अन्य बदमाशों की पहचान कर ली। पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात से दो महीने पहले जयपुर पुलिस ने कई बदमाशों को पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया था कि अजय यादव पर हमला हो सकता है। पुलिस ने अजय को आगाह भी किया। अजय ने क्राइम की दुनिया से अलग होने की बात कहते हुए इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब समझिए अजय यादव हत्याकांड के पीछे की कहानी… अजय यादव और मुकेश यादव कभी साथ काम किया करते थे। मुकेश वैशाली नगर इलाके के खातीपुरा में शिव विहार कॉलोनी में रहता था। मुकेश पर हत्या, हत्या का प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के 16 केस दर्ज थे। दोनों की दोस्ती 2008 से चली आ रही थी। दोनों वैशाली नगर और बनीपार्क थाने में दर्ज मामलों में सहअभियुक्त भी रहे। 2015 में जवाहर सर्किल इलाके में हरिशंकर उर्फ गगन पंडित पर फायरिंग हुई। जांच में सामने आया कि फायरिंग हरियाणा के संजय शर्मा ने कराई थी। फायरिंग में शामिल लोगों को अजय यादव ने रेलवे स्टेशन के सामने एक मकान में शरण दी। फायरिंग में नाम आने पर अजय यादव फरार हो गया। फरारी के दौरान 2016 में अजय यादव ने मदद के लिए मुकेश को अजमेर बुलाया। इस मुलाकात के दौरान मुकेश ने अजय की हंसी उड़ाते हुए उसका चैप्टर क्लोज होने की बात कही। एक मजाक से दोस्ती में आ गई दरार इस मजाक के चलते दोनों की दोस्ती में दरार आ गई। अजय ने मुकेश को मदद के लिए बुलाया था। उसे इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। इसके बाद मुकेश ने अजय का साथ छोड़ दिया। वह झोटवाड़ा के हिस्ट्रीशीटर प्रदीप यादव (43) की गैंग में शामिल हो गया। उसके साथ मिलकर जमीनों की खरीद-फरोख्त का काम करना शुरू कर दिया। प्रदीप खातीपुरा रोड पर सहजपुरा में रहता था। विवादित जमीनों की खरीद फरोख्त का काम करने के कारण उस पर 17 केस दर्ज हो चुके थे। पुलिस ने 2006 में उसकी हिस्ट्रीशीट खोली थी। जवाहर सर्किल के फायरिंग केस में अजय गिरफ्तार हुआ। वह 2018 में जमानत पर जेल से छूटा। तब उसे पता चला कि मुकेश उसके हिस्से की जमीनों के सौदे के पैसे भी ले चुका है। गैंग की ताकत दिखाने के तीसरे दिन प्रदीप पर हमला प्रॉपर्टी के लेन-देन को लेकर अजय और मुकेश के बीच विवाद बढ़ गया। अजय ने कई बार मुकेश और उसके बहनोई राजेंद्र को आपत्तिजनक शब्द कहे थे। राजेंद्र ही पुलिस केस में मुकेश की मदद करता था। अब मुकेश को भी लगने लगा था कि अजय कभी भी उसकी हत्या करा देगा। हालांकि मुकेश भी अकेला नहीं था, उसे प्रदीप का साथ मिल रहा था। मुकेश और प्रदीप यादव 5 मार्च 2020 को मालवीय नगर के हिस्ट्रीशीटर मुकेश सैनी की शादी में शामिल हुए। मुकेश ने गैंग की ताकत दिखाने के लिए इन फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसके तीन दिन बाद 8 मार्च को अजय के साथी हिमांशु जांगिड़ और बंटी शर्मा ने प्रदीप पर हमला कर दिया। वारदात के समय प्रदीप झोटवाड़ा स्थित अपने ऑफिस में बैठा था। इस हमले में प्रदीप गंभीर घायल हो गया। इलाज के दौरान उसके पेट के नीचे का हिस्सा पैरालाइज हो गया। वह चलने फिरने में भी असमर्थ हो गया। इसके लिए मुकेश और प्रदीप अजय को ही दोषी मानने लगे। प्रदीप का दोस्त वीरेंद्र चौधरी भी इस बात से सहमत था। वीरेंद्र पर 10 केस दर्ज थे। इनमें से 7 मामलों में वह प्रदीप के साथ आरोपी है। जमीनों के विवाद में दो गैंगों में बंटे इन बदमाशों के बीच खूनी जंग शुरू हो गई। हालांकि इस केस के जांच अधिकारी ने अपनी जान में हमले का कारण बंटी शर्मा और प्रदीप के बीच रुपयों को लेकर चल रहे विवाद को माना। पैरालाइज प्रदीप ने तैयार की पूरी प्लानिंग फायरिंग में घायल प्रदीप का कई दिनों तक इलाज चला। इस दौरान वह अजय से बदला लेने की योजना बनाने लगा। इसी बीच उस पर हमला करने वाले हिमांशु और बंटी शर्मा अमरसर सरपंच की हत्या के मामले में गिरफ्तार होकर जेल चले गए। अजय यादव अकेला रह गया। इस पर प्रदीप ने 8 जून 2021 को अपने घर पर मीटिंग की। मीटिंग में मुकेश यादव, वीरेंद्र चौधरी उर्फ बिल्लू चौधरी, आशीष शेखावत उर्फ अक्षय सिंह, लोकेश यादव, विष्णु शर्मा और हरियाणा से बुलाए गए प्रदीप के रिश्तेदार जयसिंह यादव, प्रवीण कुमार और विश्वास सारासर शामिल हुए। पंजाब से बुलाया शॉर्प शूटर, मुकेश ने संभाली हथियारों की जिम्मेदारी मीटिंग में सौंपी जिम्मेदारी के आधार पर वीरेंद्र चौधरी ने चूरू के चैनपुर गांव से अपनी मौसी के बेटे सत्यवान कड़वासरा और मामा के बेटे जितेंद्र कुमार को भी शामिल कर लिया। सत्यवान ने पंजाब से शूटर बलजिंदर सिंह बाबा को गांव में बुलाया। दोनों लंबे समय से एक दूसरे को जानते थे। वीरेंद्र ने शूटर बलजिंदर सिंह बाबा को जयपुर में रैकी के लिए ठहराने की जिम्मेदारी लोकेश यादव और विष्णु शर्मा को दी। मुकेश ने अपने स्तर पर हथियारों की व्यवस्था की। 5 अगस्त 2021 को बलजिंदर और जितेंद्र जयपुर आए। इसके अगले दिन वीरेंद्र भी जयपुर आ गया। वीरेंद्र चौधरी ने योजना के मुताबिक ऑनलाइन ऑर्डर कर जीपीएस ट्रैकर मंगाया। जीपीएस अजय यादव के नाम से ही मंगाया गया। इसके लिए मोबाइल नंबर वीरेंद्र ने अपने दिए थे, ताकि जीपीएस की लोकेशन मिलती रहे। ट्रैकर में लगे मैग्नेटिक स्टिक के कारण इसे किसी भी वाहन में आसानी से लगाया जा सकता था। पहला मामला, जिसमें जीपीएस से ट्रैक कर की हत्या वीरेंद्र चौधरी ने 8 अगस्त 2021 को अपने मोबाइल में जीपीएस ट्रैकर ऐप इंस्टाल किया। इसके बाद वह जीपीएस ट्रैकर को अपने साथ रखकर उसकी एक्यूरेशी चैक की। जिसकी पुष्टि वीरेंद्र के कॉल डिटेल और जीपीएस ट्रैकर की कंपनी से लिए डेटा से हुई। अजय की स्कॉर्पियो घर के बाहर ही पार्क होती थी। ऐसे में अजय की गाड़ी में जीपीएस लगाने का काम पहले बलजिंदर बाबा और सत्यवान को सौंपा। दोनों ने जीपीएस लगाने की 3 बार कोशिश की। भीड़भाड़ होने के कारण कामयाब नहीं हो सके। आखिरकार 16 सितम्बर को बलजिंदर और आशीष को अजय के घर के सामने की होटल में ठहराया गया। अगले दिन दोनों 15 मिनट में अजय की गाड़ी में चैचिस के पास जीपीएस लगाकर आ गए और होटल का कमरा खाली कर दिया। इसके बाद से वे अजय को जीपीएस की मदद से ट्रैक कर रहे थे। चारों शूटर सेंट्रल पार्क, बनीपार्क स्थित बर्ड पार्क व स्पेश सिनेमा के सामने शराब की दुकान पर बैठकर अजय की लोकेशन लेकर गाड़ी का पीछा करते थे। गाड़ी में अजय के साथ कभी उसके परिवार के लोग तो कभी दोस्त व अन्य लोगों के होने के कारण वे वारदात को अंजाम नहीं दे पा रहे थे। उधर, बलजिंदर बाबा, मुकेश यादव व वीरेंद्र चौधरी ने चौथे शूटर आशीष शेखावत उर्फ अक्षय सिंह को 14 सितम्बर 2021 को मुंबई से जयपुर बुलाया। रैकी और प्लानिंग के बाद की वारदात बदमाशों ने 13 सितम्बर से अजय पर नजर रखना शुरू कर दिया। वीरेंद्र ने 17 सितम्बर को 15 हजार रुपए नकद देकर दूसरी नई स्कूटी खरीद ली। वहीं मुकेश अपने बहनोई राजेंद्र से उसकी लोकेशन मंगवा रहा था। राजेंद्र ने अजय यादव के रोजाना सूतमील कॉलोनी में चाय की दुकान पर जाने की पुष्टि की। अब अजय का पीछा करने के लिए दो एक्टिवा थी। इनकी डिग्गी में बदमाश हमेशा 2 देशी कट्टे, 3 पिस्टल और कारतूस रखते थे। आशीष व मुकेश नई एक्टिवा पर और वीरेंद्र चौधरी व बलजिंदर सिंह बाबा पुरानी एक्टिवा पर बैठकर पीछा कर रहे थे। इन्होंने 19 व 20 सितम्बर को अजय का पीछा किया लेकिन हमला नहीं कर सके। 21 सितम्बर को सभी बदमाश एक बार फिर सेंट्रल पार्क पहुंचे। यहां वे ऐप की मदद से अजय की गाड़ी को ट्रैक करने लगे। दोपहर साढ़े 12 बजे अजय की लोकेशन सूतमील कॉलोनी में आ गई। बदमाशों ने स्कॉर्पियो में बैठे अजय पर फायरिंग की। अजय जब बचने के लिए चाय की थड़ी की ओर भागा तो मुकेश व बलजिंदर ने उसे पकड़ कर नीचे गिरा दिया। भारी पत्थर से वार कर अजय का सिर कुचल दिया। फायर करने के दौरान देशी कट्टे व पिस्टल से फायर नहीं हो रहे थे। जिनके खाली केस मौके पर मिले। इस दौरान आशीष शेखावत ने अजय की गाड़ी में लगा जीपीएस निकाल लिया। हिस्ट्रीशीटर मुकेश यादव ने किया सुसाइड दोनों स्कूटी पर सवार आरोपी चिंकारा कैंटीन, पानीपेच, चौंमू पुलिया, मुरलीपुरा होते हुए सीतारामपुरी पहुंचे। मुकेश यादव व बलजिंदर सिंह बस से सीकर की तरफ चले गए। वीरेंद्र और आशीष एक्टिवा को छुपाने के बाद अजमेर रोड पहुंचे और दूदू के लिए बस से निकल गए। दूदू बस स्टैंड पर दोनों जीपीएस ट्रैकर में लगी सिम को तोड़ दिया और जीपीएस को फेंक दिया। वहां से पाली और फिर गुरुग्राम पहुंचे। इस दौरान पीछा करती पुलिस जब नारनौल पहुंची तो वे हरिद्वार पहुंच गए। मुकेश व बलजिंदर के छिपने के ठिकानों के बारे में पता नहीं चल सका। इसी बीच फरारी काटने के दौरान मुकेश यादव की किसी रिश्तेदार ने आर्थिक मदद नहीं की और न ही उसे शरण दी। वह पुलिस से छुपता हुआ चौंमू में अपने मामा की बेटी के घर छुपने पहुंचा। यहां भी शरण नहीं मिलने पर वह कुछ देर आराम करने की बात कहकर कमरे में चला गया। जब थोड़ी देर बाद रिश्तेदार ने देखा तो मुकेश पंखे से लटका मिला। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ। पुलिस ने इन्हें किया गिरफ्तार पुलिस ने वारदात के बाद जयपुर से फतेहपुर तक करीब 175 किलोमीटर में लगे करीब 700 कैमरों की रिकार्डिंग खंगाली। जिसमें बदमाश स्कूटी पर जाते नजर आए। पुलिस ने हत्या के 10 दिन बाद प्रवीण कुमार उर्फ पवन यादव व जयराज सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद जयसिंह यादव, राजेंद्र यादव, वीरेंद्र चौधरी, आशीष शेखावत, जितेंद्र कुमार और सत्यवान कड़वासरा को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से केस अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इन आरोपियों की जमानत हो गई है। वहीं पंजाब का शॉर्प शूटर बलजिंदर सिंह बाबा और वीरेंद्र चौधरी उर्फ बिल्लू अभी जेल में बंद है। विष्णु शर्मा और लोकेश यादव अभी फरार चल रहे हैं। झोटवाड़ा थाने के हिस्ट्रीशीटर प्रदीप यादव को हत्याकांड के दो साल बाद 1 जून 2023 को गिरफ्तार किया। करीब एक साल जेल में बंद रहने के बाद मई 2024 में कोर्ट ने उसकी मेडिकल कंडीशन को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली। अभी वह जमानत पर है। …. हिस्ट्रीशीटर का दिल-दहलाने वाले मर्डर का पार्ट-1 भी पढ़िए… पहले गोलियां मारीं, फिर पत्थर से वार, सिर 5 इंच जमीन में धंसा, पार्ट-1 राजस्थान क्राइम फाइल में इस बार कहानी अजय यादव हत्याकांड की। अजय यादव कभी जयपुर के सदर पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ 10 केस दर्ज थे। इसी बीच एक मर्डर केस में नाम आने पर अजय यादव जेल चला गया। पूरी खबर पढ़िए…


