लखनऊ में बाघ ने दोबारा लौटकर शिकार खाया:अब तक 4 जानवरों को मारा, 25 गांवों के लोग परेशान; वन विभाग की टीम बेबस

लखनऊ के काकोरी इलाके में बाघ 25 दिनों से घूम रहा है। हर हफ्ते वह शिकार करके अपनी भूख मिटा रहा है। अब तक बाघ 2 नील गया, 1 जंगली सुअर और 1 भैंस के बच्चे का शिकार कर चुका है। टाइगर की दहशत इतनी है कि 20 गांवों के लोग घरों में कैद होने पर मजबूर हैं। वहीं, वन विभाग की टीम के तमाम प्रयास फेल होते जा रहे हैं। बुधवार की रात बाघ ने भैंस के बच्चे का बचा हुआ मांस खा लिया। सोमवार को टाइगर ने इसका शिकार किया था। तब मचान के पास से भैंस के बच्चे को बाघ खींच ले गया और वन विभाग की टीम सिर्फ शोर मचाती रह गई। मचान के पास किया शिकार, गन तक नहीं उठा सके अफसर
सोमवार को बाघ ने वन विभाग की टीम के सामने मचान के पास बंधे भैंस के बच्चे (पड़वा) को शिकार बनाया। घटना के वक्त कानपुर प्राणी उद्यान के डॉ. नसीर और अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन कोई भी ट्रैंकुलाइज गन उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। शोर मचाने पर पड़वा को बाघ जंगल में खींच ले गया। DFO बोले- टीम ने शोर मचाकर बाघ को भगाया
DFO डॉ. सितांशु पांडेय ने कहा- बाघ भैंस के पड़वा को खींचकर ले जा रहा था, तब टीम ने शोर मचाया, जिससे वह भाग गया। इसके बाद बाघ ने जंगल के मरे सांड को खींच लिया। इससे पहले बाघ ट्रैप कैमरे में भी कैद हुआ था, लेकिन वन विभाग की टीम कुछ नहीं कर पाई। क्या हैं बाघ को पकड़ने के इंतजाम?
वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए 15 ट्रैप कैमरे, दो कैचिंग केज और 5 टीमें लगाई हैं। कॉम्बिंग के लिए लाठी-डंडे, सुतली और बुलेट बम का सहारा लिया जा रहा है। एक्सपर्ट तो बुलाए गए, लेकिन कुछ हासिल नहीं हो पाया है। अभी तक हाथियों का भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। बाघ की गतिविधियां तो रिकॉर्ड हो रही हैं, लेकिन उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है। गांवों में दहशत का माहौल, जानवर भी डरे
काकोरी इलाके में गांव के लोगों का कहना है कि वन विभाग की टीम केवल औपचारिकता निभा रही है। जब तक बाघ, इंसान पर हमला नहीं करेगा, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा। गांव के लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। लोग अपने खेतों तक डर की वजह से नहीं जा पाते। वहीं, मवेशियों को भी जंगल में चारे के लिए नहीं ले जाते। गांव के पशु भी डरे हैं और उन्हें खूंटे से बांधकर चारा दिया जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि चारा खत्म हो जाएगा तब क्या होगा? विशेषज्ञों की कमी और हाथियों का न आना बड़ा सवाल
बाघ पकड़ने के लिए जरुरी ट्रैंकुलाइजेशन एक्सपर्ट्स और हाथियों का न होना, वन विभाग की तैयारी की पोल खोलता है। 25 दिन से चली आ रही इस लापरवाही ने गांव वालों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। ………………………………. यह भी पढ़ें लखनऊ में बाघ का खौफ…अफसर गन तक नहीं उठा पाए:सामने से दहाड़ता हुआ निकल गया; 20 गांवों के लोग घरों में कैद लखनऊ के काकोरी में 24 दिन से बाघ दहाड़ रहा है। वन विभाग की टीम भी दहशत में है। सोमवार शाम को बाघ वन विभाग के मचान के पास आ गया। अफसरों के सामने ही उसने पिंजड़े के पास बंधे भैंस के बच्चे (पड़वा) का शिकार किया, मगर मचान पर बैठे अफसर कुछ नहीं कर पाए। अफसर इतने डर गए कि ट्रैंकुलाइज गन तक नहीं उठा सके। बाघ दहाड़ता हुआ जंगल में चला गया। अफसर सिर्फ शोर मचाते रह गए। फिलहाल, 20 गांवों के लोग बाघ के डर से घरों में कैद हैं। अकेले बाहर नहीं निकलते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *