पथरी और लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का प्रभाव कम करने के लिए उपयोग की जाने वाली जिस उर्सोडियोक्सीकोलिक एसिड टैबलेट को नई दिल्ली की कंपनी ने नकली बताया है। दूसरी ओर, यही टैबलेट रायपुर के सरकारी लैब में जांच में पास कर दी गई। रायगढ़ जिले से सैंपल कलेक्ट कर इसे रायपुर के सरकारी लैब में भेजा गया था। एक सैंपल सन फार्मा कंपनी को भी भेजा गया, क्योंकि टैबलेट में सन फार्मा कंपनी का लेबल और पता लिखा था। कंपनी ने सैंपल का 15 बिन्दुओं पर भौतिक सत्यापन किया। 15 में से 7 बिन्दुओं के आधार पर कंपनी ने कहा- ये टैबलेट हमारा उत्पाद नहीं है। आशंका जताई कि यह नकली है। रायगढ़ जिले से जिस सुधीर केमिस्ट नामक स्टोर्स से उर्सोडियोक्सीकोलिक एसिड 300 मिलीग्राम प्रति टैबलेट का सैंपल लिया गया है, रिकॉर्ड के मुताबिक उसके पास तब 300 स्ट्रिप टैबलेट थीं, जिसकी कीमत 5-6 लाख रुपए है। सुधीर केमिस्ट (रायगढ़)ने टैबलेट हर्ष फार्मा जबलपुर से खरीदी है। हर्ष फार्मा को टैबलेट ए फार्मा लखनऊ से सप्लाई हुई है। वर्तमान में टैबलेट की गुणवत्ता टेस्ट करने एक सैंपल कोलकाता की ड्रग लेबोरेटरी में भेजा गया। जहां से रिपोर्ट नहीं आई है। इधर, लखनऊ के बाद आगे का चैनल का भी पता नहीं चल सका है। जानिए ….. कब क्या हुआ रायगढ़ के एक ड्रग इंस्पेक्टर ने अगस्त 2025 में सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजा था। सितंबर में लैब में ये टैबलेट मानक बताई गई है। इसके बाद सन फार्मा ने इस टैबलेट की फिजिकल रिपोर्ट रायपुर भेजी। इसमें इसे स्पूरियस बताया गया है। उर्सोडियोक्सीकोलिक एसिड टैबलेट का बैच नंबर GTF3302A है। जिसे नवंबर 2024 में बनाया गया था। इसकी एक्सपायरी अक्टूबर 2026 में होगी। एक स्ट्रिप में 15 टैबलेट हैं, जिसमें एमआरपी 632 रुपए दर्ज है। टैबलेट के रंग में भी अंतर है सन फार्मा द्वारा की गई भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट के मुताबिक जिस टैबलेट का सैंपल उन्हें भेजा गया था। वो कंपनी के मानक के 7 बिन्दुओं पर मेल नहीं खा रही है। टैबलेट पैकिंग के प्रिंट में जिन अक्षरों पर फॉर्मूला व अन्य जानकारी लिखी है। ये कंपनी की पैकिंग से अलग है। क्यूआरकोड साइज मेल नहीं खा रहे हैं। टैबलेट के रंग को भी अलग बताया गया है। लाइसेंस संख्या की कोलन की स्थिति अलग है। आइटम कोड भी अलग है। खुलासे के बाद सन फार्मा ने लखनऊ के प्रशासन को नकली दवाइयों की चेन का पता लगाने के लिए पत्र भी लिखा था। इस एक्ट के तहत नकली है टैबलेट
ड्रग एक्ट 1940 धारा 17 B के मुताबिक यदि वह अपने को किसी ऐसे निर्माता का उत्पाद बताती है, जबकि वह वास्तव में उस निर्माता का उत्पाद नहीं है। ऐसी औषधि भी स्पूरियस (जाली) मानी जाएगी। कोलकाता से अभी तक नहीं आई है रिपोर्ट
जांच में पता चला है कि टैबलेट लखनऊ से आई है। टैबलेट की गुणवत्ता टेस्ट कराने सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी कोलकाता भेजी गई है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। – सविता रानी, ड्रग इंस्पेक्टर, रायगढ़। अगर स्टैंडर्ड पर खरी हो, तो पास हो सकती है
टैबलेट में जो मानक रहने चाहिए वो सही मिले होंगे, इसलिए टैबलेट पास हुई होगी। हां, जिस कंपनी का नाम टैबलेट पर लिखा है, उन्होंने इसे नहीं बनाया है। तो नकली है।
– तृप्ति जैन, प्रभारी, खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर


