रांची स्मार्ट सिटी से गुजर रही लटमा और नकटी नदी की सूरत अब बदलेगी। लगभग मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी दोनों नदियों का जीर्णोद्धार करके उसे रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा। दोनों नदियों के किनारे हरियाली होगी। इसे अर्बन फॉरेस्ट का रूप दिया जाएगा। साथ में छोटी-छोटी वॉटर बॉडी भी विकसित की जाएंगी, ताकि पानी की कमी नहीं हो। नदी में स्मार्ट सिटी का गंदा पानी नहीं जाएगा। क्योंकि, नदी में आने वाले पानी को ट्रैप करके सीवरेज प्लांट में साफ किया जाएगा। इसके बाद स्वच्छ पानी नदी में छोड़ा जाएगा। इसके अलावा स्मार्ट सिटी परिसर में 40 किमी. लंबा स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया है। ड्रेनेज सिस्टम से बारिश का पानी सीधे नदी में जाकर गिरेगा। दोनों नदियों को विकसित करने का डिजाइन तैयार करके काम शुरू करने की स्वीकृति स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन ने दे दी है। इसके लिए जल्द ही कंसल्टेंट का चयन होगा। कॉर्पोरेशन ने डीपीआर तैयार करने आैर पीएमसी के लिए प्रस्ताव मांगा है। इसका टेक्निकल बिड 9 जनवरी को खुलेगा। बारिश का पानी बचेगा, घर के गंदे पानी से होगी गार्डनिंग स्मार्ट सिटी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनकर तैयार हैं। घरों से निकलने वाले गंदे पानी की भी रिसाइकिलिंग होगी। इसके बाद उस पानी का इस्तेमाल गार्डनिंग और नदी में पानी बनाए रखने के लिए किया जाएगा। स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम औ डब्ल्यूटीपी से निकलने वाला पानी लटमा और नकटी नदी में 11 स्थानों पर गिरेगा। लटमा और नकटी नदी स्मार्ट सिटी परिसर से होकर गुजर रही है। दोनों नदी के स्वरूप में छेड़छाड़ किए बिना उसे रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा। अर्बन फॉरेस्ट और वाटर बॉडी भी तैयार किए जाएंगे। स्मार्ट सिटी में एक लाख से अधिक लोग रहेंगे। उन्हें लाभ होगा। -अमित कुमार, सीईओ, स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन 2.5 एकड़ जमीन पर विकसित होगा अर्बन फॉरेस्ट शहर के अंदर जंगल का अहसास कराने के लिए स्मार्ट सिटी में काम चल रहा है। घटती हरियाली आैर बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए अर्बन फॉरेस्ट विकसित होगा। करीब 2.5 एकड़ जमीन को जंगल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां 8000 से अधिक विभिन्न प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। इसमें जंगली के साथ औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। जंगल में पीपल, नीम, बरगद, शीशम, सागवान के पौधे भी लगेंगे।


