लड़की ने काटा हाथ, किसी का रंग काला पड़ा:नशा करने वाले राजस्थान के युवाओं में 70% को एमडी ड्रग की लत, मरने-मारने को तैयार रहते हैं

जोधपुर का फर्स्ट ईयर का इंजीनियरिंग स्टूडेंट। अचानक वजन गिरने लगा, शरीर काला पड़ गया। इतना गुस्सा कि बात-बात पर मारपीट करने लगता। 12वीं क्लास की छात्रा। हाथ पर जगह-जगह कट के निशान। दोस्तों के साथ पब और पार्टियों में जाती थी। नशे की लत लग गई। एक दिन घर में अकेले नशे की इतनी गोलियां खा लीं कि बेहोश हो गई। गेट तोड़कर बाहर निकालना पड़ा। 12वीं में पढ़ने वाला होनहार स्टूडेंट। नशे की लत ने ऐसा बर्बाद किया कि कमरे से बाहर निकलना बंद कर दिया। कपड़ों में ही पेशाब करने लगा। ये तो सिर्फ 3 उदाहरण हैं। राजस्थान के युवाओं को बर्बाद कर रहे नशे की हकीकत इससे कहीं ज्यादा घिनौनी है। राजस्थान में सूखा नशा करने वाले 70% युवा सिनथैटिक एमडी की चपेट में हैं। करीब 30% गांजा, अफीम, डोडा चूरा ले रहे हैं। चार महीने के दौरान एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीम अलग-अलग कार्रवाई में करोड़ों की ड्रग्स पकड़ चुकी है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए पूरी रिपोर्ट… ANTF के चीफ विकास कुमार ने बताया कि 2024 तक लग रहा था कि पश्चिमी भारत से राजस्थान में यह ड्रग सप्लाई हो रही है। महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात से छोटी-छोटी मात्रा में ड्रग्स राजस्थान आ रहा है। 2024 में जांच के बाद राजस्थान के पश्चिमी इलाकों में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्रियों की बात सामने आने लगी। एमडी यहां से ड्रग्स अन्य राज्यों में जा रही है। राजस्थान ANTF ने इस पर काम करना शुरू किया। चार माह में 19 एमडी की फैक्ट्री पकड़ी गईं। करोड़ों की ड्रग्स भी रिकवर हुई। विकास कुमार ने बताया कि हमारी जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि यह एमडी ड्रग इतना खतरनाक है कि जो युवा इसका उपयोग दो बार कर लेता है, फिर दूसरा नशा नहीं करता। उसे यही ड्रग चाहिए होती है। नशा करने वाले युवाओं में 70% एमडी ड्रग की लत का शिकार बन गए हैं।
जालोर, सिरोही, बाड़मेर और जोधपुर में मिली फैक्ट्री सिरोही, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर के इलाकों में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। दूसरे राज्यों से कच्चा माल यहां पर लाकर ड्रग्स तैयार की जाती है। गिरफ्तार तस्करों से हुई पूछताछ में सामने आया कि फैक्ट्री लगाने के लिए बहुत बड़ी जगह नहीं चाहिए। विकास कुमार ने बताया कि एमडी ड्रग्स के काम में ज्यादातर वो लोग जुड़े हैं, जो पहले परंपरागत नशे का काम करते थे। कई ने तो गुजरात-महाराष्ट्र की जेलों में अन्य तस्करों से सिंथैटिक ड्रग बनाने का तरीका समझा। 4 महीने में 100 कार्रवाई राजस्थान सरकार ने चार महीने पहले ANTF की स्थापना की थी। यह यूनिट सिर्फ मादक पदार्थ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बनाई गई है। इस टीम ने पिछले 4 माह में 100 से अधिक कार्रवाई की है। 31 बदमाश पकड़े गए हैं, जिनपर करीब 8 लाख रुपए का इनाम था। टीम निरंतर प्रदेश और प्रदेश के बाहर जाकर भी कार्रवाई कर रही है। गिरफ्त में आए तस्करों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उनके कस्टमर में कई लड़कियां भी शामिल हैं। इस तरह नसों में घुल रहा नशा केस 1 : नशा नहीं मिलने पर वायलेंट हो जाता जयपुर की सीनियर साइकाइट्रिस्ट अनिता गौतम ने बताया कि उनके पास जोधपुर से एक केस आया। इंजीनियरिंग फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट का वजन लगातार कम हो रहा था। शरीर काला पड़ने लगा। परिजनों ने मेडिकल टेस्ट कराया तो पता चला वह ड्रग्स लेता है। काउंसलिंग कराई तो स्टूडेंट ने बताया कि इंजीनियरिंग के लिए वह घर से दूर रहता था। उसका रूम पार्टनर गांजा पीता था। ऐसे में स्टूडेंट ने भी शुरू कर दिया और लत पड़ गई। हाल ये हो गया कि नशा नहीं मिलता तो वायलेंट हो जाता। अब बच्चे की काउंसलिंग कर साइको थैरेपी दी जा रही है। केस 2 : पब में जाकर नशे की लत की शिकार 12वीं कक्षा की छात्रा को उसके घरवाले डॉक्टर के पास लेकर गए। छात्रा के हाथ में कई जगह कट के निशान थे। नशा नहीं मिलने पर छात्रा ने खुद ये कट लगाए थे। छात्रा से बात हुई तो पता चला कि घर पर माता-पिता के बीच में अक्सर झगड़ा होता था। ऐसे में वह पब में ज्यादा वक्त दोस्तों के साथ पार्टी करने में बिताने लगी। इसी दौरान नशे की लत की शिकार हो गई। एक दिन वह घर पर अकेली थी। उसने इतनी गोलियां खा ली कि गेट नहीं खुला। परिजनों ने गेट तोड़कर उसे निकाला। वर्तमान में छात्रा का इलाज चल रहा है। केस 3 : कपड़ों में कर देता पेशाब सीकर का 12वीं क्लास का स्टूडेंट पढ़ने में होशियार था। गलत दोस्तों की संगत में नशे की आदत पड़ गई। धीरे-धीरे नशे का इतना आदी हो गया कि घर से बाहर जाना बंद कर दिया। खुद को कमरे में बंद कर लिया कई बार तो वह अपने कपड़ों में ही पेशाब कर देता। घरवालों को पता चला तो इलाज के डॉक्टर के पास ले गए। कई महीनों के इलाज के बाद अब स्थिति काफी हद तक कंट्रोल में है। केस 4 : फुटबॉल खेलते-खेलते नशे का आदी जयपुर में 10वीं क्लास का छात्र फुटबॉल खेलता था। इसी दौरान उसकी दोस्ती कुछ सीनियर्स से हो गई। उनके साथ छात्र ने स्मैक पीना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्चे को स्मैक की आदत पड़ गई। माता-पिता से खेलने के लिए फीस लेता और उस पैसे से स्मैक पी लेता। कुछ दिनों में उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। बच्चे की पढ़ाई और खेल दोनों खराब होने लगा। घरवाले उसे डॉक्टर के पास ले गए। वर्तमान में बच्चे का इलाज चल रहा है।

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