तारीख: 20 फरवरी 2026। जगह: उज्जैन का महाकाल मंदिर। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक युवक और एक युवती को रोका। दोनों एक होटल की तरफ जा रहे थे। कार्यकर्ताओं ने युवक से उसका नाम पूछा। पहले युवक ने नाम नहीं बताया। जब सख्ती की गई, तो उसने अपना नाम नसीम अकरम बताया। नाम सुनते ही बजरंग दल के लोगों ने युवक के साथ जमकर मारपीट की। युवक दिल्ली का रहने वाला है। वह हिमाचल प्रदेश की एक लड़की के साथ उज्जैन आया था। दोनों महाकाल मंदिर इलाके में एक होटल में ठहरे हुए थे। बजरंग दल ने आरोप लगाया कि युवक के मोबाइल में युवती के साथ-साथ अन्य लड़कियों के न्यूड वीडियो और फोटो मिले हैं। इसके बाद महाकाल थाने की पुलिस ने युवक को थाने ले जाकर पूछताछ की। हिंदू संगठनों ने ऐसे करीब 16 मामले पकड़े ये कोई एक मामला नहीं है। पिछले दो महीनों में सिर्फ उज्जैन में ही बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने ऐसे करीब 16 मामले पकड़े हैं। इनमें युवक मुस्लिम था और युवती हिंदू। हालांकि कई मामलों में दोनों बालिग थे, इसलिए कानूनी रूप से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिन मामलों में लड़की नाबालिग थी, वहां पुलिस ने केस दर्ज किया और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। खास बात ये है कि बजरंग दल और वीएचपी ने ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए एक खास नेटवर्क बना लिया है। यह नेटवर्क कैसे काम करता है? इनके पास सूचनाएं कहां से आती हैं? और कैसे एक वॉट्सऐप मैसेज कुछ ही घंटों में लाइव एक्शन (मौके पर पहुंचकर कार्रवाई) में बदल जाता है? भास्कर की टीम ने करीब 8 घंटे संगठन के पदाधिकारियों के साथ रहकर ऐसे ही एक ऑपरेशन को अपनी आंखों से देखा। साथ ही एक्सपर्ट और पुलिस अफसरों से बात कर ये समझा कि कानून की चौखट पर ये मामले कितनी देर टिक पाते हैं। पढ़िए रिपोर्ट… इन तीन केस से समझें ‘लव जिहाद’ का कथित पैटर्न केस-1: बिछड़ौद का वीडियो कांड उज्जैन जिले की घट्टिया तहसील के बिछड़ौद गांव में पिछले साल 7 मई को एक लड़की का आपत्तिजनक वीडियो सामने आया। इसमें फरमान नाम का युवक दिख रहा था। पुलिस ने फरमान को पकड़ा। उसके मोबाइल में गांव की कई अन्य लड़कियों के अश्लील वीडियो मिले। जांच में पता चला कि फरमान उज्जैन आरटीओ में एक प्राइवेट एजेंट है। वह लाइसेंस बनवाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में लगने वाले कैंपों में जाता था। वहीं से वह लड़कियों के मोबाइल नंबर हासिल करता था और उन्हें अपने दोस्तों में बांट देता था। केस-2: ‘रोहित’ बनकर मिला ‘सोहेल’ एक दूसरे मामले में सोहेल नाम के युवक ने खुद को ‘रोहित’ बताकर एक नाबालिग लड़की से दोस्ती की। जब वह लड़की से मिलने गया, तो उसके दोस्तों ने गलती से उसे ‘सोहेल’ नाम से पुकार लिया। लड़की को शक हुआ। सोहेल ने कबूल किया कि वह मुस्लिम है। फिर उसने लड़की को धमकी दी कि अब उसे उससे शादी करनी होगी और नमाज पढ़नी पड़ेगी। केस-3: ग्रूमिंग जिहाद का चौंकाने वाला चेहरा 5 साल की एक नाबालिग लड़की की कहानी और भी डरावनी है। उसकी दोस्ती एक नाबालिग लड़के से हुई। कुछ महीनों बाद जब दोनों के बीच दूरियां बढ़ीं, तो लड़के ने अपने एक दोस्त को लड़की के संपर्क में ला दिया। यह दोस्त लड़की को झांसा देकर इंदौर ले गया। वहां उसके साथ रेप किया। इसके बाद उसे बुर्का पहनने को मजबूर किया गया। हिंदू संगठनों ने इसे ग्रूमिंग लव जिहाद का नाम दिया है। यानी पहले दोस्ती, फिर शोषण और धर्म बदलवाने की कोशिश। ये मामले उज्जैन में हाल के समय में चर्चा में आए हैं, जहां हिंदू संगठन ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए सक्रिय हैं। पुलिस कई मामलों में जांच कर रही है और जहां नाबालिग शामिल हैं, वहां कार्रवाई भी हो रही है। कैसे काम करता है बजरंगदल-वीएचपी का नेटवर्क? भास्कर की टीम ने वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ पूरा दिन बिताया, ताकि यह समझा जा सके कि इन तक सूचनाएं कैसे पहुंचती हैं और कार्रवाई इतनी तेजी से कैसे होती है। 18 फरवरी को त्रिपुंड (माथे पर तिलक) और रुद्राक्ष की माला पहने जफर नाम के युवक को हिंदू संगठनों ने पकड़ा था। उस समय भास्कर की टीम कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद थी। वॉट्सऐप पर सूचना मिलते ही तुरंत एक्शन भास्कर की टीम विश्व हिंदू परिषद (VHP) के स्थानीय कार्यालय में थी। पदाधिकारी एक अहम बैठक की तैयारी कर रहे थे। दोपहर 1 बजे जिला संयोजक ऋषभ कुशवाह के मोबाइल पर एक वॉट्सऐप मैसेज आया। मैसेज में लिखा था- नानाखेड़ा की एक होटल में एक मुस्लिम युवक, एक हिंदू युवती के साथ ठहरा हुआ है। ऋषभ ने फौरन यह जानकारी जिलाध्यक्ष राजेश आंजना को दी, जो उसी कार्यालय में मौजूद थे। बैठक को स्थगित कर दिया गया। आंजना ने अपना फोन उठाया और एक के बाद एक कई नंबर डायल करने लगे। कुछ कॉल संगठन के अन्य पदाधिकारियों को किए गए। कुछ कॉल्स उन स्थानीय कार्यकर्ताओं को किए गए, जो नानाखेड़ा इलाके की भौगोलिक स्थिति और लोगों की जानकारी रखते थे। करीब 8 से 10 फोन कॉल्स के बाद भी जब सूचना की पक्की पुष्टि नहीं हुई, तो संगठन के सदस्य लवेश सोनी को कुछ साथियों के साथ मौके पर भेज दिया गया। भास्कर की टीम भी होटल की ओर निकल पड़ी लवेश के साथ भास्कर की टीम भी उस होटल की ओर निकल पड़ी। रास्ते में लवेश का फोन लगातार चलता रहा। वह अपने नेटवर्क के अन्य साथियों को निर्देश दे रहा था कि होटल के बाहर इकट्ठा हो जाएं। इस तरह एक साधारण वॉट्सऐप मैसेज से शुरू होकर कुछ ही समय में पूरी टीम मौके पर पहुंच जाती है। संगठन का यह नेटवर्क स्थानीय लोगों, ऑटो वालों, स्टूडेंट्स आदि से सूचनाएं इकट्ठा करता है और तेजी से एक्शन लेता है। लड़की का आईडी मिला, लड़के का नहीं
लवेश अपनी टीम के साथ सीधे होटल के रिसेप्शन पर पहुंचा। वहां मौजूद कर्मचारी से उसने एंट्री रजिस्टर दिखाने को कहा। थोड़ी आनाकानी और बहस के बाद, कार्यकर्ताओं के दबाव में कर्मचारी रजिस्टर दिखाने पर राजी हो गया। उसने बताया कि आज केवल दो कमरे ही बुक हुए हैं-एक में एक परिवार ठहरा है और दूसरे में एक कपल। ‘कपल’ शब्द सुनते ही कार्यकर्ताओं का शक यकीन में बदलने लगा। जब उन्होंने आईडी मांगी, तो रजिस्टर में लड़की की आईडी तो थी, लेकिन लड़के का कोई पहचान पत्र नहीं था। कर्मचारी ने सफाई देते हुए कहा, “लड़के ने कहा है कि वह महाकाल मंदिर दर्शन करने जा रहा है और लौटते समय आईडी जमा कर देगा।” इस पर कार्यकर्ता भड़क गए कि बिना आईडी के कमरा कैसे दिया गया, लेकिन किसी तरह मामला शांत हुआ। कार्यकर्ताओं के दबाव में कर्मचारी ने उस नंबर पर फोन लगाया जो बुकिंग के समय दिया गया था। फोन लड़की ने उठाया। कर्मचारी ने कहा, “मैडम, आपके साथी की आईडी जमा नहीं हुई है, कृपया जमा करा दें।” इस पर लड़की गुस्से में बोली, “हमारे पास और कोई आईडी नहीं है। हमने बुकिंग के समय ही बता दिया था। पैसे तो पूरे दे दिए हैं न!” यह कहकर उसने फोन काट दिया। चार घंटे का इंतजार और पकड़ा गया युवक
अब कार्यकर्ताओं को पूरा यकीन हो गया कि मामला संदिग्ध है। दोपहर के दो बज चुके थे। लड़के और लड़की के लौटने का इंतजार करने के अलावा कोई और चारा नहीं था। सभी कार्यकर्ता होटल के आसपास ही जम गए। यह इंतजार लंबा खिंचा और शाम 6 बजे खत्म हुआ, जब गेरूए वस्त्र पहने एक युवक, लड़की के साथ होटल में दाखिल हुआ। कार्यकर्ताओं ने तुरंत उसे घेर लिया। नाम पूछने पर वह आनाकानी करने लगा। जब दबाव बनाया गया, तो उसने अपना नाम ‘जफर’ बताया। नाम सुनते ही कुछ युवा कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और उसकी पिटाई शुरू कर दी। हालांकि, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें रोका और तत्काल पुलिस को सूचित किया। नानाखेड़ा थाना होटल से महज 20 कदम की दूरी पर था, इसलिए पुलिस भी फौरन मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने जफर को हिरासत में लिया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए थाने ले गई। अब जानिए कैसे काम करता है ये नेटवर्क बजरंग दल और वीएचपी कार्यकर्ताओं को सटीक सूचनाएं कैसे मिलती हैं? और ये नेटवर्क कैसे काम करता है? इसे लेकर भास्कर ने संगठन के सदस्यों से बात की। 1.हर स्कूल-कॉलेज में टीम
संगठन के सक्रिय सदस्य लवेश सोनी बताते हैं, ‘हिंदू लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसाने का यह षड्यंत्र सबसे ज्यादा स्कूल और कॉलेजों में चलता है। इसलिए हमने वहीं अपना सबसे मजबूत नेटवर्क तैयार किया है।’ लवेश के अनुसार, उनके पास शहर के लगभग हर स्कूल-कॉलेज में छात्रों की एक समर्पित टीम है। वे हर सप्ताह नए लड़कों को संगठन से जोड़ते हैं। 2. गतिविधियों पर रखते हैं नजर
यह नेटवर्क कैसे काम करता है, इसकी प्रक्रिया बेहद सुनियोजित है। लवेश बताते हैं, ‘कॉलेज की हमारी टीम इस बात पर नजर रखती है कि कौन सी लड़की किससे बात कर रही है, उसकी गतिविधियां क्या हैं। अगर कोई हिंदू लड़की किसी मुस्लिम युवक के साथ घुलमिल रही है, तो हमारी टीम उस पर नजर रखना शुरू कर देती है। 3. सूचना की पुष्टि होने पर निगरानी
जब ये लोग किसी होटल, कैफे या ऐसी किसी सुनसान जगह पर जाते हैं, जहां लड़की के साथ कोई अनहोनी हो सकती है, तो हमारी टीम उनका पीछा करती है और सही समय पर हमें सूचना देती है। इसके बाद हमारी एक्शन टीम मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगेहाथ पकड़ती है और लड़के को पुलिस के हवाले कर देती है। VHP-बजरंग दल को सूचना मिलने के सात अहम सोर्स यह पूरा ऑपरेशन एक बेहद विस्तृत और बहुस्तरीय सूचना तंत्र पर आधारित है। संगठन को जानकारी केवल एक स्रोत से नहीं, बल्कि कई अलग-अलग स्रोतों से मिलती है, जो एक खुफिया एजेंसी की तरह काम करते हैं। हिंदू संगठनों का तर्क-यह एक संगठित षड्यंत्र
वीएचपी के जिलाध्यक्ष राजेश आंजना इसे एक जिहादी सोच और संगठित षड्यंत्र बताते हैं। वे कहते हैं, प्यार में क्या किसी का आपत्तिजनक वीडियो बनाना जरूरी है? जब हम किसी को पकड़ते हैं, तो उसके मोबाइल में कई लड़कियों के ऐसे वीडियो मिलते हैं जिन्हें देखकर शर्म आ जाए। इसे रोकने के लिए हमारा सिस्टम काम करता है। एसपी बोले-हम कार्रवाई करते हैं, दिखाते नहीं उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा इन घटनाओं के लिए दो प्रमुख कारण बताते हैं, पहला शहर में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि (25 हजार से 5 लाख प्रतिदिन) और सोशल मीडिया का दुरुपयोग। वे हिंदू संगठनों की कार्रवाई पर कहते हैं, ऐसा नहीं है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र कमजोर है। हम लगातार कार्रवाई करते हैं, लेकिन हम दिखाते नहीं क्योंकि हम किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं। एक्सपर्ट बोले- कपल यदि बालिग तो कार्रवाई नहीं रिटायर्ड डीएसपी अंगद सिंह राठौर इसके दूसरे पहलू के बारे में बताते हैं। वे कहते हैं कि यदि हिंदू संगठनों ने किसी कपल को पकड़ भी लिया। लड़का मुस्लिम है और लड़की हिंदू और दोनों बालिग है तो पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। लड़की यदि ये कह दे कि उसे किसी तरह की शिकायत नहीं करना है तो फिर पुलिस कुछ नहीं कर सकती। वे कहते हैं कि यदि लड़की नाबालिग है तो फिर पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। वे इस बात की तरफ भी इशारा करते हैं कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए माता-पिता को अलर्ट रहने की जरूरत है।


