मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 14 जुलाई 2024 को सीहोर के भैरूंदा कस्बे की नारायण सिटी कॉलोनी गोलियों की आवाज से दहल उठी थी। एक नकाबपोश हमलावर ने घर में घुसकर 17 वर्षीय आरती कीर की जान ले ली थी और उसकी मां ललिता को मौत के मुंह में धकेल दिया था। पुलिस के हाथ खाली थे, कोई सुराग नहीं, कोई गवाह नहीं था। आखिर कौन था ये शख्स? जब इस मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी सुलझी तो हर कोई ये जानकर हैरान रह गया। कोर्ट ने हत्यारे को उम्रकैद की सजा सुनाई। पढ़िए पार्ट-2… अस्पताल के बिस्तर से खुली हत्याकांड की परतें
मामले की जांच एक अंधे कुएं में गोता लगाने जैसी थी, जब तक कि भोपाल के अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही ललिता कीर को होश नहीं आया। सिर में गोली लगने के बावजूद उनकी हिम्मत ने पुलिस को वह पहली और सबसे अहम कड़ी दी, जिसकी उन्हें तलाश थी। दर्द से कराहती ललिता ने जब अपनी धुंधली यादों को समेटकर बोलना शुरू किया, तो एक ऐसे नाम का खुलासा हुआ जिसने जांच की दिशा ही बदल दी। पुलिस ने जब उनसे किसी पुरानी रंजिश या बेटियों के प्रेम प्रसंग के बारे में पूछा, तो ललिता ने कांपती आवाज में बताया, यह किसी अनजान शख्स का काम नहीं है। यह प्रभु सिंह दायमा है… गांव का ही रहने वाला। वह मेरी बेटी आरती को कई महीनों से परेशान कर रहा था। यह नाम सामने आते ही पुलिस के कान खड़े हो गए। दोस्ती, इनकार और धमकियों का खौफनाक सिलसिला
ललिता ने पुलिस को जो बताया, वह किसी भी माता-पिता के लिए एक बुरे सपने जैसा था। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले आरती और प्रभु सिंह के बीच दोस्ती थी और वे फोन पर बात करते थे। लेकिन प्रभु सिंह का व्यवहार आरती को ठीक नहीं लगा और उसने समझदारी दिखाते हुए उससे दूरी बना ली और बातचीत बंद कर दी। आरती का यह इनकार प्रभु सिंह बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसकी दोस्ती, जुनून और फिर नफरत में बदल गई। इसके बाद शुरू हुआ धमकियों और पीछा करने का एक अंतहीन सिलसिला। ललिता ने बताया, घटना से करीब 5-6 महीने पहले से वह आरती का कॉलेज आते-जाते पीछा करता था। वह उसे रास्ते में रोकता, बात करने का दबाव बनाता था। आरती ने यह बात अपने माता-पिता को बताई थी। परिवार ने इसे नजरअंदाज नहीं किया और प्रभु सिंह के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, जो घटना के समय न्यायालय में विचाराधीन थी। लेकिन कानून का डर भी प्रभु सिंह के सिर से जुनून का भूत नहीं उतार सका। धोखा दिया है, तुझे और तेरे पिता को मार दूंगा
प्रभु सिंह की सनक इस हद तक बढ़ गई थी कि वह कीर परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का कोई मौका नहीं छोड़ता था। 19 फरवरी 2024 की सुबह, जब पूरा परिवार सो रहा था, आरती के छोटे भाई उदय ने घर के मेन गेट की कुंडी में एक पत्र फंसा हुआ देखा। उस पत्र में लिखी बातें किसी धमकी से कम नहीं थीं। धोखेबाजी और कई आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। उसमें लिखा था- तुमने मुझे सिर्फ टाइमपास समझा। इस पत्र को लेकर भी परिवार ने थाने में शंका के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इससे पहले नवंबर-दिसंबर 2023 में, प्रभु सिंह ने आरती के मोबाइल से उसकी मां ललिता के नंबर पर फोन कर भद्दी-भद्दी गालियां दी थीं। गिरफ्तारी और कबूलनामा: 24 हजार में खरीदी मौत
ललिता कीर के बयान के आधार पर पुलिस ने बिना कोई देरी किए प्रभु सिंह दायमा की तलाश शुरू कर दी। घटना के तीन दिन बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआत में वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने उसके मोबाइल की लोकेशन हिस्ट्री खंगाली, तो 14 जुलाई की रात उसकी लोकेशन घटनास्थल पर ही पाई गई। इस ठोस सबूत के सामने वह टूट गया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि आरती ने जब बात बंद कर दी, तो वह खुद को अपमानित महसूस कर रहा था और उसने बदला लेने की ठान ली थी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए उसने सौरभ नाम के एक युवक से 24 हजार रुपए में एक अवैध रिवॉल्वर और 6 कारतूस खरीदे थे। कोर्ट में मानसिक विक्षिप्त होने का नाटक हुआ फेल
मामला जब कोर्ट पहुंचा, तो आरोपी प्रभु सिंह दायमा ने खुद को बचाने के लिए एक नया पैंतरा खेला। उसके वकील ने दलील दी कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसने यह अपराध बिना सोचे-समझे, अपनी मानसिक अस्थिरता के कारण किया। लेकिन न्यायालय ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की, कोई भी मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति इतनी सटीकता से योजना नहीं बना सकता। वह अवैध हथियार और कारतूस खरीदकर, घर में घुसकर, सटीक निशाना लगाकर एक की हत्या और दूसरे पर जानलेवा हमला नहीं कर सकता। यह एक सोची-समझी और पूर्व-नियोजित साजिश है, जो आरोपी की आपराधिक मानसिकता को दर्शाती है, न कि उसकी मानसिक अस्वस्थता को। इंसाफ की जीत: सनकी आशिक को मिली उम्रकैद
कोर्ट में ललिता, उनके बेटे उदय और दूसरी बेटी ने प्रभु सिंह के खिलाफ गवाही दी। उन्होंने उस रात के मंजर को बयां किया और बताया कि गोली चलाने वाला शख्स प्रभु सिंह ही था। पुलिस ने सबूत के तौर पर धमकी भरा पत्र, पुरानी शिकायतें, गवाहों के बयान और सबसे बढ़कर, मोबाइल लोकेशन का रिकॉर्ड पेश किया, जिसने मामले को पानी की तरह साफ कर दिया। सभी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर, न्यायालय ने प्रभु सिंह दायमा को आरती कीर की हत्या (IPC की धारा 302) और उसकी मां ललिता कीर पर जानलेवा हमला करने ( IPC की धारा 307) का दोषी पाया। कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, रिवॉल्वर बेचने के आरोपी सौरभ सिंह के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिल पाए, जिसके चलते उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़िए… नाबालिग के सीने में उतारी 3 गोलियां…मां को शूट किया मध्य प्रदेश क्राइम फाइल में आज बात सीहोर के उस गोलीकांड की जिसने इलाके में सनसनी फैला दी थी। ये घटना 14 जुलाई 2024 की है। जिले के भैरूंदा कस्बे की शांत नारायण सिटी कॉलोनी में एक अज्ञात हमलावर ने एक घर में घुसकर मां और बेटी पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। पढ़ें पूरी खबर…


