बारां कृषि उपजमंडी में लहसुन के भावों में उछाल रहने से पिछले आठ महीने में 769 करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार हुआ है। इस अवधि में पिछले पांच साल में लहसुन की सबसे कम आवक रही है। भावों में तेजी से रिकार्ड कारोबार हुआ है। इसमें मंडी में करीब सवा 12 करोड़ का टैक्स सिर्फ लहसुन से मिला है। जिले में रबी सीजन में 2023-24 में 18 हजार 338 हैक्टेयर में लहसुन की बुवाई हुई। अप्रैल महीने से मंडी में लहसुन की आवक शुरू हो गई। इस दौरान लहसुन का भाव लगातार अच्छा बना रहा। अप्रैल से नवंबर तक मंडी 5 लाख 23 हजार 369 क्विंटल लहसुन की आवक हुई है। मंडी प्रशासन के अनुसार पूरे सीजन 23 से 24 हजार रुपए क्विंटल औसत भाव रहे हैं। पहली दीपावली के बाद मूहूर्त में लहसुन का भाव 55 हजार रुपए क्विंटल रहा, जो पूरे सीजन में रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है। अकेले लहसुन से पूरे सीजन में 769 करोड़, 31 लाख 58 हजार रुपए का कारोबार हुआ है। मंडी में 12 करोड़ 30 लाख रुपए का टैक्स मिला है। डंठल सहित 11 महीने तक सुरक्षित रहता है लहसुन
गुलाबपुरा निवासी प्रगतिशील किसान गणपतलाल नागर ने बताया कि बारां के देसी लहसुन में औषधीय गुण रहते हैं। इसको डंठल सहित 11 महीने तक सहेजकर रख सकते हैं। जमीन से कुछ ऊंचाई पर पांच फीट ऊंचाई तक का पाला रखते हैं। डंठल सहित खुली हवादार जगह में सुखाते हैं। सर्दी में नमीदार हवा से ढंक कर रखते हैं। डंठल अलग करते ही एक से दो महीने तक सुरक्षित रहता है। ऐसा रहा लहसुन का व्यापार लहसुन की मांग ज्यादा होने से भावों में तेजी
लहसुन व्यापार संघ अध्यक्ष जगदीश बंसल ने बताया कि इस साल लहसुन का उत्पादन कम हुआ है। इसलिए बाजार में लहसुन की मांग ज्यादा होने से भाव अच्छे हैं। आगामी दिनों में भावों में उछाल के आसार है। बार्य का लहसुन देश के उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि स्थानों पर जाता है। मंडी सचिव मनोज मीणा ने बताया कि जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपजमंडी में लहसुन के दाम इस साल रिकॉर्ड स्तर पर बढ़े है। इससे मंडी में भी आय में बढ़ोतरी हुई है। इस वित्तीय वर्ष में बीत 8 महीने में मंडी में अकेले लहसुन से 12.30 करोड़ रुपए का टैक्स मिला है। आगामी दिनों में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है।


