भास्कर न्यूज | अमृतसर सेंट्रल नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बिना लाइसेंस के नशीली दवाएं खरीद और बेच रहे अस्पताल और फार्मा कंपनी के 2 मालिकों को गिरफ्तार किया है, जबकि मामले में 4 लोग फरार हैं। एनसीबी 6 दिन की कार्रवाई के बाद रैकेट को ब्रेक किया। वहीं फार्मा कंपनी के पास 50 हजार ट्रामाडोल रखने का लाइसेंस था, मगर वह जिन 2 प्राइवेट अस्पतालों को इन गोलियों को बेच रही थी उनके पास ट्रामाडोल रखने का लाइसेंस नहीं था। दवा कारोबार के बाध्यता के कारण बलीस्टा कंपनी के संचालक अमित भंडारी को एनसीबी ने ज्वाला एस्टेट स्थित फार्मा कंपनी ऑफिस–घर से सुबह 5 बजे गिरफ्तार किया, कंपनी का दूसरा संचालक दीपक भंडारी उस वक्त घर में मौजूद न होने के कारण पकड़ में नहीं आया। करीब 8 घंटे चली कार्रवाई में एनसीबी ने 31000 हजार से ज्यादा गोलियां बरामद कीं। इसके बाद एनसीबी ने बटाला रोड स्थित द कॉरपोरेट अस्पताल में रेड कर संचालक जतिंदर मल्होत्रा को गिरफ्तार किया। यहां से 2 हजार ट्रामाडोल गोलियां बरामद हुईं। इसके बाद फतेहगढ़ चूड़ियां अस्पताल में दबिश दी गई। यहां से भी सैकड़ों गोलियां बरामद हुईं, मगर अस्पताल के संचालक रेशम कुमार और प्रवीण कुमार हाथ नहीं लगे। दवाएं हरियाणा की एक फर्म तैयार करती थी। फिर गाजियाबाद की फर्म के जरिए बलीस्टा फार्मा दवाएं अमृतसर में खरीद कर लाती थी। बलीस्टा फार्मा उन्हें आगे अस्पतालों को सप्लाई करती थी। अमित की गिरफ्तारी के बाद सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक दोनों अस्पतालों में दस्तक दी गई।एनसीबी ने दोनों अस्पतालों से जुड़ा रिकॉर्ड भी कब्जे में ले लिया है। इस मामले में दो महिलाओं और पांच पुरुषों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें अमित, दीपक भंडारी, जतिंदर मल्होत्रा और रेशम कुमार व प्रवीण कुमार शामिल हैं। अमित की एक फर्म दिल्ली में भी रजिस्टर्ड है। टीम उसकी जांच के लिए भी दिल्ली रवाना हो गई है। बलीस्टा फार्मा लाइसेंस देखकर सेल करती तो कार्रवाई की नौबत नहीं आती। एनसीबी ने शुक्रवार अमित को अदालत में पेश कर रिमांड हासिल कर लिया। कानून के जानकारों के अनुसार एनडीपीएस एक्ट के तहत उक्त दोनों अस्पतालों के संचालक और बलीस्टा फार्मा के संचालकों के खिलाफ बराबर का जुर्म है।


