ग्वालियर प्रदेश में एक मात्र स्मार्ट सिटी का ऐसा शहर है, जहां बिना सिटी बसों के संचालन के इनके स्टॉपेज नजर आएंगे। इन बस स्टॉप को बसों के लिए नहीं, बल्कि निगम की आय बढ़ाने के लिए विज्ञापन के लिए बनाया गया। शहर में ऐसे बस स्टॉप की संख्या 110 है। इनमें कई तो ऐसी जगह बना दिए गए हैं जहां फिलहाल सिटी बस चलने की संभावना ही नहीं है। इसमें 15 फीट के एरिया में निगम का विज्ञापन होना था। वह भी गायब हो गया है। अनुबंध के अनुसार जिस कंपनी को ठेका दिया है, उसे सफाई और चौकीदार का प्रबंधन करना था। ये आज तक नहीं हो सका। निगम ने दो फेज में इंदौर की ऐसेंट ब्रांड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी है। पहले फेज में 30 और दूसरे में 100 की जगह केवल 85 ही बनाए। इन पर निगम ने अनुबंध में 500-500 वर्गफीट जमीन हर बस स्टॉप के लिए कंपनी को दी हुई है। अनुबंध में शर्त है कि 500 वर्ग फीट एरिया में से 15% (75 वर्ग फीट) पर निगम का विज्ञापन किया जाना है, लेकिन अफसरों की मिलीभगत के चलते कंपनी अनुबंध को नजर अंदाज कर रही है। जिम्मेदारों का तर्क नोडल अधिकारियों ने नहीं की देखरेख, अब बोले- परीक्षण करेंग, नोटिस देंगे कंपनी अनुबंध का पालन कर रही है या नहीं इसके निरीक्षण का जिम्मा नोडल अधिकारी सतेंद्र भदौरिया, अपर आयुक्त अनिल दुबे की थी, लेकिन दोनों ने कार्रवाई नहीं की, इससे निगम को रेवेन्यु का निरंतर नुकसान हो रहा है। अपर आयुक्त अनिल दुबे का कहना है कि बस स्टॉप को लेकर कंपनी अनुबंध का पालन नहीं कर रही है। इसे चेक कराकर नोटिस जारी करेंगे। बचते रहे नोडल अधिकारी
नोडल अधिकारी सतेंद्र भदौरिया से जब इस संबंध में फोन लगाया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया। मैसेज का जवाब भी नहीं दिया।
200-200 मीटर पर स्टॉप, बैंच तक नहीं लगी बस स्टॉप के अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर करेगें कार्रवाई
बस स्टॉप लगाने वाली कंपनी अनुबंध का पालन नहीं कर रह है, तो इसे चेक कराएंगे। रेवेन्यू का हरगिज़ नुकसान नहीं होने देंगे। -अमन वैष्णव, आयुक्त ननि
अपील समिति से राहत पाने की कोशिश में सांवरिया सेठ विज्ञापन नियमों की अनदेखी कर फुटपाथ और डिवाइडर पर खतरनाक स्ट्रक्चर खड़े करने के मामले में तत्कालीन आयुक्त हर्ष सिंह ने विज्ञापन अनुबंध खत्म कर दिया था। इसके बाद कंपनी के संचालकों ने राहत पाने के लिए अपील समिति में अपील की है। समिति में मामला होने के कारण निगम अमला इस कंपनी द्वारा लगाए गए खतरनाक स्ट्रक्चर पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। समिति की बैठक नहीं होने से शहर के अंदर अवैध स्ट्रेक्चर से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।


