प्रदेश सरकार एक तरफ 100 यूनिट फ्री बिजली का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली निगम के कारनामे उपभोक्ताओं को हाई वोल्टेज करंट दे रहे हैं। मामला भरतपुर के केसरिया गांव का है, जहां स्मार्ट मीटर लगते ही डिस्कॉम की बरसों पुरानी लापरवाही और कागजी फर्जीवाड़ा उजागर होने लगा है। एक ग्रामीण उपभोक्ता भीम सिंह के घर जब इस महीने का बिल पहुंचा, तो राशि देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। महज 17 यूनिट बिजली खर्च करने पर विभाग ने 97,103 रुपए का बिल थमा दिया। परेशान उपभोक्ता जब काम-धंधा छोड़कर डिस्कॉम कार्यालय पहुंचा, तो वहां मौजूद अधिकारी भी दंग रह गए। बिल को जब बारीकी से खंगाला गया, तो पता चला कि इसमें 14 हजार यूनिट का 95,317 रुपए पुराना बकाया जोड़ दिया गया है। भीम सिंह का दावा है कि उन्होंने आज तक एक भी बिल पेंडिंग नहीं छोड़ा और हर महीने समय पर भुगतान किया है। अब सवाल यह है कि अगर बिल जमा थे, तो यह 14 हजार यूनिट का बकाया अचानक कहां से आ गया। डिस्कॉम अफसरों के अनुसार ये कोई अकेला मामला नहीं है, अब तक बयाना, वैर, उच्चैन, रुदावल, छौंकरवाड़ा आदि क्षेत्रों से 200-225 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें 40 यूनिट का बिल 2500 हजार रुपए, 70 यूनिट का बिल 6200 रुपए, 112 यूनिट का 18 हजार रुपए का आ चुका है। यह स्मार्ट मीटर में तकनीकी गलती है या बिल की रीडिंग लेकर आने वाले कर्मचारी। इसको लेकर डिस्कॉम अफसरों द्वारा दोनों स्तरों पर जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेईएन गनपत सिंह लोधा ने जब लाइनमैन से पूछताछ की, तो उसने कहा कि वह समय-समय पर रीडिंग लेता रहा है। अगर रीडिंग सही ली जा रही थी, तो इतना बड़ा अंतर पहले क्यों नहीं आया। प्रथमदृष्टया यह लाइनमैन की लापरवाही या मीटर रीडिंग के खेल में किए गए फर्जीवाड़े का संकेत है।


