लापरवाही बरतने पर सीपी ने दो एसीपी समेत 13 पुलिस कर्मियों को शो-कॉज नोटिस भेजा

भास्कर न्यूज | लुधियाना शहर के एक दवाई कारोबारी के साथ साइबर ठगी के केस में सही से जांच न करने पर हाई-कोर्ट की दखलअंदाजी के बाद लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने 13 पुलिस कर्मियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। इनमें दो एसीपी और 11 इंस्पेक्टर शामिल हैं, जिन पर समय पर कार्रवाई न करने और जांच में ढिलाई बरतने के आरोप हैं। मामला साल 2021 का बताया जा रहा है जिसमें दवा कारोबारी वरिंदर सूद (82) वासी उधम सिंह नगर के बैंक खाते से बिना ओटीपी के 15 लाख रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया था। इसके बाद पीड़ित बुजुर्ग पिछले पांच साल से न्याय के लिए लगातार पुलिस और अदालत के चक्कर काटता रहा और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन जांच करने वाले अधिकारी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। अब हाईकोर्ट की दखलअंदाजी के बाद सीपी स्वपन शर्मा ने लापरवाही बरतने वाले 13 पुलिस कर्मचारी जिनमें एसीपी सुमित सूद (वर्तमान में एसीपी ईस्ट), डीएसपी मनिंदर बेदी (तत्कालीन एसीपी नॉर्थ), डीएसपी बिट्टन कुमार (तत्कालीन एसएचओ, हैबोवाल) के अलावा इंस्पेक्टर परमदीप सिंह, सतपाल, आकाश दत्त, गगनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह, परमवीर सिंह, अमृतपाल सिंह, मधु बाला, गुरमुख सिंह और सतवीर सिंह को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। बता दें कि उपरोक्त में से कुछ वर्तमान में थानों में एसएचओ तैनात हैं। पीड़ित के बेटे ऋषि सूद ने यह भी मांग की है कि इस मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो, क्योंकि उन्होंने भी समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वरिंदर सूद ने बताया कि 14 अप्रैल 2021 को उनके खाते से अलग-अलग खातों में 15 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए गए थे और जांच में तीन आरोपियों की पहचान हुई थी, जिनमें राजीव कुमार शर्मा निवासी मधुबन बिहार, चंदन कुमार पासवान निवासी पूर्णिया बिहार और नील कमल निवासी पालमपुर हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। आरोप है कि आरोपियों की पहचान होने के बावजूद पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। पुलिस की मौजूदगी में भागा था आरोपी: उनके बेटे ऋषि ने आरोपी नील कमल का पता लगाकर पुलिस को सूचना दी थी, जिसके बाद 1 जुलाई 2021 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिले के पंचरुखी क्षेत्र में छापा मारा गया। इस दौरान ऋषि और उसका दोस्त अंकुर मेहता भी पुलिस के साथ थे और नील कमल को पकड़ लिया गया था, लेकिन पुलिस की लापरवाही के चलते वह मौके से फरार हो गया। इसके बाद आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हलफनामे में स्वीकार किया लापरवाही का होना: मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद पुलिस ने अदालत को बताया कि 13 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया गया कि जांच में लापरवाही हुई है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है, साथ ही अदालत को भरोसा दिलाया गया है कि चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश की जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने साफ कहा है कि संबंधित अधिकारियों को सात दिन के भीतर अपना जवाब देना होगा और यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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